रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह एक बार फिर कांग्रेस के निशाने पर हैं। कांग्रेस ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए जवानों की जानकारी कथित तौर पर छिपाने और संसद को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए रक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की है। इस विवाद ने सरकार के लिए एक बड़ी मुश्किल खड़ी कर दी है।
ऑपरेशन सिंदूर और 13 महीने का रहस्य पूरा मामला मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ा है। हाल ही में दिल्ली स्थित नेशनल वॉर मेमोरियल की दीवार पर उन 6 जवानों के नाम अंकित किए गए, जो इस ऑपरेशन के दौरान शहीद हुए थे। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने एक साल से अधिक समय तक इन जवानों की शहादत को सार्वजनिक नहीं किया।
विपक्ष का हमला: संसद में बोला गया झूठ कांग्रेस के पूर्व सैनिक विभाग के प्रमुख कर्नल (रिटायर्ड) रोहित चौधरी ने आरोप लगाया कि जुलाई 2025 में संसद के भीतर राजनाथ सिंह ने यह कहकर देश को गुमराह किया था कि ऑपरेशन सिंदूर में कोई भी भारतीय सैनिक शहीद नहीं हुआ। कांग्रेस ने इसे शहीदों का अपमान बताते हुए तीन प्रमुख मांगें रखी हैं:
क्या है सरकार का पक्ष? विवाद बढ़ने पर रक्षा मंत्रालय ने सफाई दी है कि रक्षा मंत्री के बयान को गलत संदर्भ में पेश किया गया है। मंत्रालय के अनुसार, राजनाथ सिंह का बयान उस समय की उड़ रही उन अफवाहों के जवाब में था जिनमें विमान गिरने का दावा किया जा रहा था। उनका आशय यह था कि ऑपरेशन में कोई पायलट या विमान दुश्मन के हाथ नहीं लगा। सरकार का कहना है कि शहीदों को पूरा सैन्य सम्मान दिया गया था और गोपनीयता सुरक्षा कारणों से बरती गई थी।
सुरक्षा बनाम जवाबदेही: क्या घिरेंगे राजनाथ? यह विवाद अब एक गंभीर बहस में तब्दील हो चुका है। एक तरफ बीजेपी रणनीतिक चुप्पी साधे हुए है, तो दूसरी तरफ विपक्ष इसे लोकतांत्रिक जवाबदेही का मुद्दा बना रहा है। कांग्रेस का तर्क है कि अगर शहीदों का सम्मान पहले ही किया जा चुका था, तो संसद में उन्हें आधिकारिक रूप से स्वीकार करने में 13 महीने क्यों लगे?
फिलहाल भाजपा ने इस पर कोई आधिकारिक राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन आगामी संसद सत्र में यह मुद्दा सरकार की साख के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। क्या सरकार इस चुप्पी से बाहर आएगी या यह विवाद मंत्री के इस्तीफे की मांग तक ही सीमित रहेगा, यह देखना शेष है।
BJP सरकार आने से पहले परंपरा थी कि जो भी देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देता था, उसके प्रति सार्वजनिक तौर पर कृतज्ञता व्यक्त की जाती थी।
— Congress (@INCIndia) June 29, 2026
लेकिन सेना और सैनिकों के नाम पर राजनीति करने वाली मोदी सरकार ने देश और सैनिकों को बार-बार धोखा दिया है।
हमारे DGMO ने प्रेस वार्ता में जिस तरह से… pic.twitter.com/ykiixnHtXh
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