कंगाल पाक की गीदड़भभकी: पानी के लिए दिखाए तेवर, तो भारत ने दिया कड़ा जवाब
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सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहा तनाव एक बार फिर चरम पर है। अपनी खस्ताहाल अर्थव्यवस्था से जूझ रहे पाकिस्तान ने अब भारत को पानी के मुद्दे पर युद्ध की धमकी दी है।

पानी पर हाथ डाला तो काट देंगे हाथ

इस्लामाबाद में एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक और सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने भारत पर तीखा हमला बोला। मलिक ने आक्रामक लहजे में कहा, भारत हमारे हिस्से के पानी को रोकने की कोशिश कर रहा है। जो भी हमारे पानी पर दावा करेगा, हम उसके हाथ काट देंगे। उन्होंने इस दौरान बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया।

संधि को लेकर पाक का यू-टर्न

सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने दावा किया कि सिंधु जल समझौता आज भी कानूनी रूप से बाध्यकारी है और इसे कोई भी देश एकतरफा रद्द नहीं कर सकता। उन्होंने दोहराया कि पानी पाकिस्तान की लाइफलाइन और रेड लाइन है। पाकिस्तान अब इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और डेलीगेट्स को बुलाकर इस्लामाबाद में एक सेमिनार आयोजित करने की तैयारी में है ताकि तकनीकी और कानूनी पहलुओं पर दबाव बनाया जा सके।

क्या है सिंधु जल संधि का विवाद?

1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से यह संधि हुई थी, जिसमें पूर्वी नदियों का अधिकार भारत को और पश्चिमी नदियों का पानी पाकिस्तान को मिला। लेकिन अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत का रुख सख्त हो गया। भारत ने साफ कर दिया है कि जब तक सीमा पार आतंकवाद पूरी तरह खत्म नहीं होता, तब तक संधि को सामान्य रूप से लागू नहीं माना जा सकता।

भारत का दो-टूक जवाब

पाकिस्तान की धमकियों के बीच भारत ने अपना स्टैंड स्पष्ट रखा है। संयुक्त राष्ट्र में भारत की फर्स्ट सेक्रेटरी अनुपमा सिंह ने कहा कि जो देश आतंकवाद को नीति के रूप में इस्तेमाल करता है, उससे भरोसे की उम्मीद नहीं की जा सकती। भारत का मानना है कि 60 साल पुरानी संधि आज के बदलते भू-राजनीतिक हालात में हमेशा के लिए वैसी ही नहीं रह सकती।

दुनिया का ध्यान भटकाने की साजिश?

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की यह आक्रामकता उसके आंतरिक संकट और आर्थिक बदहाली से उपजी हताशा है। पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद और अपनी विफलताओं से वैश्विक बिरादरी का ध्यान भटकाने के लिए जल जैसे संवेदनशील मुद्दों को तूल दे रहा है। भारत के सख्त रुख ने साफ कर दिया है कि कश्मीर और आतंकवाद पर कोई भी समझौता किए बिना पानी जैसे मसलों पर कोई रियायत नहीं दी जाएगी।

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