अकाल तख्त बनाम पंजाब सरकार: गुरु ग्रंथ साहिब कानून पर क्यों मची सियासी हलचल?
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पंजाब में जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम-2026 को लेकर पैदा हुआ विवाद गहरा गया है। इस मुद्दे पर सोमवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान समेत राज्य के 78 सिख विधायकों को अमृतसर स्थित अकाल तख्त के सामने पेश होना पड़ा। अकाल तख्त ने सरकार को आदेश दिया है कि वह एक महीने के भीतर इस कानून में जरूरी सुधार करे।

क्या है विवादित कानून?

13 अप्रैल 2026 को पंजाब विधानसभा में यह विधेयक सर्वसम्मति से पारित किया गया था। इस कानून का मुख्य उद्देश्य गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी (अपमान) की घटनाओं को रोकना और दोषियों के लिए कड़े दंड का प्रावधान करना था। राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून अस्तित्व में आया।

कानून में शामिल सख्त प्रावधान

नए कानून के तहत सजा की रूपरेखा काफी कठोर है:

अकाल तख्त की आपत्ति क्यों?

अकाल तख्त ने सजा के प्रावधानों का विरोध नहीं किया है, बल्कि प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। तख्त का कहना है कि सिख धर्म से जुड़े किसी भी कानून को बनाने से पहले अकाल तख्त, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) और पूरे सिख पंथ से परामर्श लेना अनिवार्य है। सरकार पर धार्मिक मामलों में सीधे हस्तक्षेप करने और सिख परंपराओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया गया है।

जत्थेदार का स्पष्ट संदेश

अकाल तख्त के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज्ज ने सभी विधायकों को आपत्तियों की सूची सौंपी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार को धार्मिक मामलों में अपनी सीमा का ध्यान रखना चाहिए और सिख समुदाय की भावनाओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

सरकार का रुख

विवाद बढ़ने के बाद पंजाब सरकार ने अकाल तख्त की भावनाओं का सम्मान करने की बात कही है। सरकार ने कानून में संशोधन करने पर अपनी सहमति जता दी है। हालांकि, सरकार का तर्क है कि उनका एकमात्र उद्देश्य गुरु ग्रंथ साहिब की पवित्रता की रक्षा करना है, न कि किसी के धार्मिक या संस्थागत अधिकारों को चुनौती देना। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार एक महीने के भीतर किन संशोधनों के साथ दोबारा प्रस्ताव पेश करती है।

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