होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) दुनिया का सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ता है, जहां जरा सी हलचल वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला देती है। हालिया संकट के दौरान जब दुनिया के कई बड़े देश ऊर्जा किल्लत से जूझ रहे थे, भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा का ऐसा अभेद्य किला पेश किया कि न तो पेट्रोल पंप खाली हुए और न ही घरों के चूल्हे ठंडे पड़े।
रिफाइनरी को सियासत से नहीं, तेल से मतलब बीपीसीएल के पूर्व चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर जी कृष्णकुमार के अनुसार, एक रिफाइनरी के लिए भू-राजनीति मायने नहीं रखती, मायने रखता है क्रूड ऑयल की निरंतर सप्लाई। भारत अपनी जरूरत का 40% कच्चा तेल, 80% एलपीजी और 55% एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है। बावजूद इसके, संकट के 100 दिनों तक देश में ऊर्जा की कोई कमी नहीं हुई।
पड़ोसी देशों की बत्ती गुल, भारत रहा गुलज़ार संकट की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चीन को अपना तेल आयात 45% तक कम करना पड़ा, जबकि जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों को अपने आपातकालीन भंडार (स्ट्रेटेजिक रिजर्व) तक का सहारा लेना पड़ा। इसके विपरीत, भारत की रिफाइनरियों ने अपनी 100% क्षमता के साथ काम जारी रखा।
41 दरवाजे और दूरदर्शी तैयारी यह सफलता रातोंरात नहीं मिली। पिछले दो दशकों में भारत ने अपने तेल आपूर्तिकर्ता देशों की संख्या 27 से बढ़ाकर 41 कर ली है। जब होर्मुज का रास्ता प्रभावित हुआ, तो भारत ने रूस, अफ्रीका और अमेरिका जैसे विकल्पों का रुख कर कमी को तुरंत पूरा कर लिया। इसके अलावा, एलपीजी टर्मिनल की संख्या 11 से बढ़ाकर 22 करना गेम चेंजर साबित हुआ।
आम आदमी पर नहीं पड़ने दिया संकट का साया एलपीजी की अंतरराष्ट्रीय कीमतें 1,600 रुपये के पार चली गई थीं, लेकिन सरकार ने आम जनता और उज्ज्वला लाभार्थियों की जेब पर बोझ नहीं पड़ने दिया। लाभार्थियों को सिलेंडर 642 रुपये में ही मिलते रहे। इस दौरान सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) ने सिर्फ पहली तिमाही में 61,000 करोड़ रुपये का घाटा सहा और रसोई गैस की कीमतों को काबू में रखने के लिए 30,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च किए। सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर इस वित्तीय झटके को खुद झेला।
भविष्य की रणनीति: सबक और सुधार जी कृष्णकुमार के मुताबिक, भविष्य को सुरक्षित करने के लिए भारत को तीन मोर्चों पर काम करना होगा:
भारत ने इस संकट से यह साबित कर दिया है कि सही कूटनीति और दीर्घकालिक बुनियादी ढांचा विकास ही किसी भी वैश्विक उथल-पुथल का सबसे ठोस जवाब है।
*Forty-one doors, one resilient system: how India kept pumps and kitchens running without Hormuz or through Hormuz disruption
— ANI Digital (@ani_digital) June 29, 2026
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