सोनिया गांधी के गाजा प्रेम पर आरपी सिंह का तीखा सवाल: क्या कभी सतनामी बाई के आंसू पोंछे?
News Image

गाजा संघर्ष पर सोनिया गांधी के हालिया लेख ने देश की राजनीति में एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने इस पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे सोनिया गांधी का चयनात्मक आक्रोश (Selective Outrage) करार दिया है।

इतिहास के घावों को याद दिलाने की चुनौती आरपी सिंह ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर नैतिकता का पाठ पढ़ाने से पहले कांग्रेस नेतृत्व को 1984 के सिख विरोधी नरसंहार और पंजाब के उस दौर का जवाब देना चाहिए, जिसने देश के इतिहास पर गहरे जख्म छोड़े हैं। उन्होंने पूछा कि जो लोग आज गाजा के लिए चिंतित हैं, उन्होंने 1984 में अपनों को खोने वाले परिवारों का दर्द क्यों नहीं समझा?

सतनामी बाई का दर्द और सोनिया की चुप्पी बीजेपी प्रवक्ता ने 1984 की पीड़िता सतनामी बाई का जिक्र करते हुए सोनिया गांधी से सीधा सवाल पूछा। 1 नवंबर 1984 को सतनामी बाई ने त्रिलोकपुरी में अपने पति को भीड़ द्वारा लोहे की सरियों से पीटकर और जिंदा जलाकर मारते हुए अपनी आंखों से देखा था। सिंह ने पूछा, क्या सोनिया गांधी ने कभी सार्वजनिक रूप से सतनामी बाई का नाम लिया? क्या उन्होंने कभी उन विधवाओं को गले लगाया या न्याय की मांग की?

पंजाब का लहूलुहान दौर आरपी सिंह ने केवल दिल्ली तक ही बात सीमित नहीं रखी। उन्होंने कहा कि 1984 के बाद पंजाब वर्षों तक आतंकवाद और हिंसा की आग में झुलसा। उस दौरान फर्जी मुठभेड़ों, हिरासत में यातना और जबरन गायब करने जैसी घटनाओं ने सिखों के मन में गहरा अविश्वास पैदा किया। उन्होंने जत्थेदार गुरदेव सिंह कौंके की हिरासत में हुई हत्या को उस दौर का सबसे दर्दनाक प्रतीक बताया।

राजीव गांधी के बयान पर उठाए सवाल कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरपी सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के उस चर्चित बयान को याद दिलाया, जिसमें उन्होंने कहा था, जब बड़ा पेड़ गिरता है, तो धरती हिलती है। सिंह ने कहा कि यह बयान नरसंहार को उचित ठहराने जैसा था, जिसने पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया।

नैतिकता के लिए निरंतरता जरूरी अंत में आरपी सिंह ने दो टूक शब्दों में कहा कि हर निर्दोष जीवन अनमोल है, लेकिन नैतिकता के लिए निरंतरता का होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि गाजा पर सोनिया गांधी का लेख मानवता के प्रति संवेदनशीलता नहीं, बल्कि राजनीतिक चयनात्मकता है। उन्होंने पूछा कि क्या कांग्रेस नेतृत्व कभी उन सिखों के प्रति वैसी ही संवेदनशीलता दिखाएगा, जैसी वे आज गाजा के लिए दिखा रहे हैं?

*

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

अयोध्या दानपेटी चोरी मामला: चंपत राय और अनिल मिश्रा पर भड़के संतोष दुबे, की नार्को टेस्ट की मांग

Story 1

29 जून की वो जादुई रात: सूर्यकुमार यादव ने पुरानी यादों में खोकर लिखा भावुक पोस्ट

Story 1

भारतीय सेना की बाज बटालियन : आसमान से दुश्मनों पर रखेगी पैनी नजर

Story 1

IPL स्टार शशांक सिंह और पिता पर मारपीट का केस, भोपाल में मचा हड़कंप

Story 1

सोनिया गांधी के गाजा प्रेम पर आरपी सिंह का तीखा सवाल: क्या कभी सतनामी बाई के आंसू पोंछे?

Story 1

जसपाल राणा के परिवार में फिर छाया मातम: बेटे के जन्मदिन पर मां ने दुनिया को कहा अलविदा

Story 1

ट्रेन में साफ-सफाई का अजीबोगरीब तरीका: हाथ धोकर फर्श पर फैलाया पानी, वीडियो वायरल

Story 1

इंग्लैंड को रौंदकर टॉम लैथम ने रचा इतिहास, 21वीं सदी में ऐसा करने वाले बने पहले कप्तान

Story 1

इंग्लैंड सीरीज: क्या इन दो स्टार खिलाड़ियों के लिए खत्म हो रहा है टीम इंडिया का रास्ता?

Story 1

स्विमिंग पूल में मौज-मस्ती बनी काल: छलांग लगाते ही फर्श से टकराया सिर, युवक की दर्दनाक मौत