भारतीय सेना की बाज बटालियन : आसमान से दुश्मनों पर रखेगी पैनी नजर
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भारतीय सेना अब ड्रोन तकनीक के मामले में एक नई क्रांति की ओर बढ़ रही है। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने घोषणा की है कि भारतीय सेना जल्द ही बाज बटालियन (Baaz Battalions) का गठन करने जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य हवाई निगरानी और जासूसी के क्षेत्र में सेना की ताकत को कई गुना बढ़ाना है।

क्या होगी बाज बटालियन की भूमिका? सेना प्रमुख के अनुसार, यह बटालियन मौजूदा रिमोटली पायलेटेड एयरक्राफ्ट फ्लाइट्स का ही एक उन्नत स्वरूप होगी। इसमें विशेष रूप से प्रशिक्षित कर्मियों का एक समूह होगा, जो इन ड्रोन्स के संचालन और प्रबंधन में माहिर होंगे।

यह बटालियन युद्धक्षेत्र में एकीकृत निगरानी, सटीक खुफिया जानकारी जुटाने और तुरंत जवाबी कार्रवाई करने में अहम भूमिका निभाएगी। दुश्मन की हर गतिविधि पर आसमान से नजर रखने के लिए यह सेना का नया ब्रह्मास्त्र साबित होगा।

50 हजार तक पहुंची ड्रोन क्षमता जनरल द्विवेदी ने सेना की बढ़ती ताकत का खुलासा करते हुए बताया कि दो साल पहले हमारे पास केवल कुछ सौ ड्रोन थे, लेकिन आज यह संख्या बढ़कर 50,000 के पार पहुंच गई है। सेना की कार्ययोजना के अनुसार, अगले दो से तीन वर्षों में यह संख्या दोगुनी होने की उम्मीद है।

सेना प्रमुख का मानना है कि जैसे-जैसे तकनीक विकसित हो रही है और लागत कम हो रही है, ड्रोन भविष्य के युद्ध में रेडियो और नाइट-विज़न डिवाइस की तरह ही अनिवार्य और सर्वव्यापी उपकरण बन जाएंगे।

लगातार मजबूत हो रहा बेड़ा भारतीय सेना अपने ड्रोन बेड़े को लगातार आधुनिक बना रही है। इसमें जेट-पावर्ड अग्निवेग कामिकेज ड्रोन से लेकर हीरोन और रुस्तम जैसे शक्तिशाली टोही ड्रोन शामिल हैं। इसके अलावा, सीमा पर सटीकता के साथ वार करने के लिए स्वदेशी एफपीवी (FPV) और बम बरसाने वाले ड्रोन्स को भी शामिल किया गया है।

बढ़ते हवाई खतरों के लिए तैयारी केवल ड्रोन ही नहीं, सेना अब उन तकनीकों को भी अपना रही है जो ड्रोन, हेलीकॉप्टर और मिसाइल जैसे हवाई खतरों को हवा में ही नाकाम कर सकें। यह पहल भविष्य के हवाई युद्धों के प्रति सेना की तैयारियों और नई रक्षा प्राथमिकताओं को दर्शाती है।

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