भारत के आंतरिक मामलों में दखल देते हुए पाकिस्तान के पूर्व उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है। उन्होंने भारत में चल रहे मंदिर-मस्जिद विवादों पर अपनी राय रखते हुए कहा कि हिंदू पक्ष को पुराने मंदिर-मस्जिद विवादों में अपना हक नहीं जताना चाहिए।
1991 के कानून का दिया हवाला अब्दुल बासित ने भारतीय कानून प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट (धार्मिक स्थल अधिनियम) का जिक्र करते हुए कहा कि 15 अगस्त 1947 को जिस स्थल की जो स्थिति थी, उसे वैसा ही रहना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि इतिहास की पुरानी बातों को वर्तमान में लाकर विवाद खड़ा करना गलत है।
ज्ञानवापी और भरूच का किया जिक्र अपने संबोधन में बासित ने उत्तर प्रदेश के ज्ञानवापी और संभल के अलावा गुजरात के भरूच की मस्जिदों का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 600-700 साल पुरानी संरचनाओं को बदलने की कोशिश करना उचित नहीं है। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर किसी मस्जिद के नीचे मंदिर होने का प्रमाण भी मिल जाए, तब भी उसे नहीं बदलना चाहिए।
पाकिस्तान का अपना ट्रैक रिकॉर्ड क्या है? अब्दुल बासित द्वारा भारत को उपदेश देना इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि पाकिस्तान में खुद अल्पसंख्यकों की स्थिति बेहद दयनीय है। बंटवारे के समय पाकिस्तान में 365 से 428 के करीब हिंदू मंदिर थे। सरकारी आंकड़ों और रिपोर्टों की मानें तो आज वहां इनकी संख्या सिमटकर महज 20-25 रह गई है।
95 फीसदी से ज्यादा मंदिरों का वजूद खत्म पाकिस्तान में 95 फीसदी से ज्यादा प्राचीन मंदिरों को या तो तोड़ दिया गया या उन्हें अवैध रूप से मदरसों, दुकानों और रिहायशी इमारतों में बदल दिया गया। जिस देश ने अपने अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों को संरक्षित रखने के बजाय उन्हें नष्ट होने दिया, उस देश के राजनयिक द्वारा भारत को धर्मनिरपेक्षता का पाठ पढ़ाना लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
अंदरूनी मामलों में दखल की आदत विशेषज्ञों का मानना है कि बासित का यह बयान पाकिस्तान की उस कुंठित मानसिकता को दर्शाता है, जिसमें वह अपने गिरेबान में झांकने के बजाय भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करना ज्यादा जरूरी समझता है। भारत में मंदिर-मस्जिद विवाद फिलहाल अदालतों और पुरातात्विक सर्वेक्षणों (ASI) के अधीन हैं, जहां कानून के दायरे में सुनवाई चल रही है।
Hindus should not take back their temples even if it s proved that temples exist beneath each mosque. Hindus should be secular.
— Pakistan Untold (@pakistan_untold) June 28, 2026
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