ईरान का वजूद मिटाने की चेतावनी: अमेरिका का 24 घंटे में दूसरा बड़ा हमला, ड्रोन साइट्स और सैन्य ठिकाने तबाह
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मिडिल ईस्ट में महायुद्ध के मुहाने पर तनाव अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। शांति समझौतों की तमाम कोशिशों को दरकिनार कर दोनों देश अब सीधी सैन्य कार्रवाई पर उतर आए हैं। पिछले 24 घंटों के भीतर अमेरिका ने ईरान पर दूसरा बड़ा हमला कर क्षेत्र में हलचल मचा दी है।

हमले की वजह: तेल टैंकर पर ड्रोन स्ट्राइक इस ताजा संघर्ष की शुरुआत तब हुई जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास पनामा के झंडे वाले तेल टैंकर एम/टी किकु पर ईरान ने ड्रोन हमला किया। यह टैंकर उस समय दो मिलियन बैरल कच्चा तेल लेकर गुजर रहा था। अमेरिका ने इस हमले का कड़ा जवाब देने का निर्णय लिया।

ट्रंप की सीधी चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ईरान को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर वे अपनी हरकतों से बाज नहीं आए, तो ईरान का अस्तित्व ही खत्म कर दिया जाएगा। ट्रंप का यह बयान ईरान के प्रति अमेरिका के कड़े रुख को दर्शाता है।

अमेरिकी सेना का बड़ा पलटवार अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि राष्ट्रपति के आदेश पर अमेरिकी नौसेना और वायुसेना ने संयुक्त कार्रवाई की। इस हमले में ईरान के 10 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसमें मिलिट्री सर्विलांस इन्फ्रास्ट्रक्चर, कम्युनिकेशन सिस्टम, एयर डिफेंस साइट्स और ड्रोन भंडारण केंद्रों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया।

ईरान का पलटवार और क्षेत्र में हलचल अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरानी मीडिया ने दावा किया है कि बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरान ने भी मिसाइल और ड्रोन से हमला किया है। ईरान के सिरिक शहर में भी धमाकों की आवाज सुनी गई है, हालांकि वहां हुए नुकसान का पूरा ब्योरा अभी आना बाकी है।

अनिश्चित भविष्य दो सप्ताह पहले ही दोनों देशों के बीच शांति समझौता हुआ था, लेकिन ताजा हमलों ने उस समझौते को कागज का टुकड़ा बनाकर रख दिया है। जानकारों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो खाड़ी देशों में एक बड़ा सैन्य संघर्ष छिड़ सकता है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ना तय है।

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