गाजा पर भारत की खामोशी नैतिक और रणनीतिक गलती , सोनिया गांधी का मोदी सरकार पर करारा प्रहार
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कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की विदेश नीति को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। गाजा में चल रहे इजरायली सैन्य अभियान के मुद्दे पर सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार की चुप्पी और निष्क्रियता को देश के हितों के लिए घातक बताया है।

गाजा में तबाही और भारत की संवेदनहीनता सोनिया गांधी ने साफ शब्दों में कहा कि गाजा में की जा रही भारी तबाही, अस्पतालों और स्कूलों को निशाना बनाना कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति है। उन्होंने पांच साल की बच्ची हिंद रजब की दर्दनाक मौत का जिक्र करते हुए सरकार पर आरोप लगाया कि भारत में उसकी कहानी पर बनी फिल्म को भी केवल इसलिए सेंसर बोर्ड में अटकाया गया ताकि इजरायल नाराज न हो।

हमास का हमला गलत, लेकिन इजरायल की क्रूरता असहनीय लेख में सोनिया गांधी ने स्पष्ट किया कि 7 अक्टूबर 2023 को हमास का हमला कायरतापूर्ण था, जिसे सही नहीं ठहराया जा सकता। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि इसके जवाब में इजरायल द्वारा की जा रही सैन्य कार्रवाई ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दी हैं। उन्होंने नेतन्याहू सरकार के पूर्ण विनाश के नारों की कड़ी आलोचना की।

भारत ने खोए पुराने दोस्त, पाकिस्तान को मिला मौका रणनीतिक मोर्चे पर सरकार को घेरते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि मोदी सरकार इजरायल के रणनीतिक प्रभाव में इतनी डूब गई है कि उसने अपने पुराने और भरोसेमंद मिडिल-ईस्ट के सहयोगियों को खुद से दूर कर लिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि भारत की इस निष्क्रियता के कारण पाकिस्तान को मध्यस्थ (Mediator) के रूप में उभरने का मौका मिल गया है, जबकि ऐतिहासिक रूप से यह भूमिका भारत की होनी चाहिए थी।

कांग्रेस का पूरा कुनबा सरकार के खिलाफ लामबंद सोनिया गांधी के इस लेख के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने सरकार पर चौतरफा हमला बोला है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोशल मीडिया पर सरकार की विदेश नीति को दिशाहीन करार दिया। राहुल गांधी ने कहा कि भारत को अपनी स्वतंत्र विदेश नीति और मानवीय मूल्यों को दोबारा स्थापित करने की जरूरत है।

क्या है निष्कर्ष? सोनिया गांधी के अनुसार, भारत की यह मौजूदा विदेश नीति किसी राष्ट्रीय हित में नहीं, बल्कि केवल पीएम मोदी और नेतन्याहू की आपसी व्यक्तिगत दोस्ती को साधने के लिए है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का अलग-थलग पड़ना देश की सुरक्षा और कूटनीतिक भविष्य के लिए एक बड़ा खतरा बनकर उभर रहा है।

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