अयोध्या के राम मंदिर में भक्तों के चढ़ावे में हुई हेराफेरी ने पूरे देश को चौंका दिया है। पुलिस ने इस मामले में 8 लोगों को गिरफ्तार किया है, जो सीधे तौर पर दान की गिनती और प्रबंधन से जुड़े थे। इन सभी को फैजाबाद कोर्ट ने तीन दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
जांच में सामने आया है कि इस घपले को अंजाम देने के लिए एक संगठित सिंडिकेट बनाया गया था। पकड़े गए आरोपियों की भूमिकाएं कुछ इस प्रकार हैं:
राम मंदिर में दान की गिनती के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने एक निजी एजेंसी को काम पर रखा है। 14 लोगों की इस टीम में 11 बैंक कर्मचारी और 3 ट्रस्ट के प्रतिनिधि होते हैं। माना जा रहा है कि यह चोरी दान पात्रों (दान पेटियों) से कैश निकालने और उसकी गिनती के बीच के समय में की जाती थी।
सितंबर 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रस्ट को एक साल में 327 करोड़ रुपये की आय हुई थी, जिसमें 153 करोड़ रुपये केवल भक्तों के दान से आए थे। इतनी बड़ी धनराशि की सुरक्षा में सेंध लगने के बाद अब विपक्ष भी हमलावर है। विपक्ष का आरोप है कि केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई करके मुख्य जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ा जा रहा है।
फिलहाल, पुलिस इस गिरोह के बाकी संपर्कों को खंगाल रही है ताकि यह पता चल सके कि क्या इस हेराफेरी में कोई और बड़ा नाम भी शामिल है।
*#WATCH | UP: Ram Mandir donations alleged embezzlement case | Following the court hearing, the eight accused are being taken away from the special court in Ayodhya
— ANI UP/Uttarakhand (@ANINewsUP) June 26, 2026
After the hearing, all the accused are being taken to Ayodhya District Jail, as they have been remanded to judicial… pic.twitter.com/NXxKG4yQ0g
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