राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: SIT ने सौंपी रिपोर्ट, जल्द हो सकते हैं बड़े खुलासे
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अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर इन दिनों दो कारणों से चर्चा में है—पहला, मंदिर के चढ़ावे में हुई कथित चोरी और दूसरा, राम जन्मभूमि का सदियों पुराना विवादित इतिहास। मंदिर प्रशासन और सरकार इस मामले को लेकर बेहद गंभीर हैं।

SIT जांच और चढ़ावा विवाद राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी के आरोपों की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है। SIT के सदस्य विजय विश्वास पंत ने अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को यह रिपोर्ट सौंपी है। जांच रिपोर्ट पूरी तरह गोपनीय रखी गई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि जल्द ही इस मामले में कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।

बाबरी मस्जिद नाम कैसे पड़ा? इतिहास के पन्नों को पलटें तो बाबरी मस्जिद नाम के पीछे का सच काफी उलझा हुआ है। प्रसिद्ध लेखक लाला सीताराम ने अपनी किताब अयोध्या: ए हिस्ट्री में दावा किया है कि 1528 में बाबर के सिपहसालार मीर बाकी ने मंदिर तोड़कर मस्जिद बनवाई थी। हालांकि, कुणाल किशोर अपनी पुस्तक अयोध्या रीविजिटेड में तर्क देते हैं कि बाबरनामा या उसके अगले 240 वर्षों के किसी भी ऐतिहासिक दस्तावेज में मस्जिद बनाने का कहीं उल्लेख नहीं है।

विरोधाभासी दावे और ऐतिहासिक साक्ष्य 18वीं सदी में भारत आए मेडिकल ऑफिसर फ्रांसिस बुकानन ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि हिंदुओं का मानना है कि मंदिर औरंगजेब ने तुड़वाया था, जबकि मस्जिद पर बाबर का नाम लिखा था। इसी विरोधाभास ने इसे बाबरी मस्जिद नाम दिया। वहीं, ऑस्ट्रियाई पादरी टेफेन्थैलर ने 1767 में पहली बार मंदिर टूटने का लिखित जिक्र किया था, जिसमें उन्होंने भी औरंगजेब का नाम लिया था।

अयोध्या का प्राचीन गौरव ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, भगवान बुद्ध के समय में अयोध्या एक समृद्ध शहर था, जिसे विशाखा के नाम से जाना जाता था। अलेक्जेंडर कनिंघम द्वारा 1862-63 में किए गए पहले पुरातात्विक सर्वेक्षण में बौद्ध कालीन सिक्के मिलने से इसकी पुष्टि होती है। अयोध्या का महत्व इस बात से भी था कि यह प्राचीन भारत के दो सबसे बड़े व्यापारिक मार्गों—उत्तर पथ और दक्षिण पथ—के मिलन बिंदु पर स्थित थी।

अयोध्या का इतिहास केवल एक मस्जिद या मंदिर के विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गुप्त वंश से लेकर आधुनिक युग तक की सभ्यताओं के उतार-चढ़ाव का साक्षी रहा है। फिलहाल, सभी की निगाहें SIT की रिपोर्ट और उससे होने वाली संभावित कार्रवाई पर टिकी हैं।

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