क्या NCERT की कृष्णा किताब में शाकाहार-मांसाहार का भेदभाव है? बोर्ड ने तोड़ी चुप्पी
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राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की कक्षा 6 की कन्नड़ भाषा की पाठ्यपुस्तक कृष्णा को लेकर हाल ही में उपजे विवाद पर बोर्ड ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। पुस्तक के नाम और उसमें शामिल खान-पान से जुड़ी सामग्री को लेकर सोशल मीडिया और मीडिया में चल रही चर्चाओं पर NCERT ने आधिकारिक बयान जारी किया है।

किताबों के नाम नदियों पर क्यों?

NCERT ने स्पष्ट किया है कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत बच्चों को भारतीय संस्कृति से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इसी के तहत भाषाओं की किताबों के नाम प्रमुख भारतीय नदियों पर रखे गए हैं।

जैसे हिंदी के लिए गंगा , अंग्रेजी के लिए कावेरी और उर्दू के लिए यमुना नाम चुने गए हैं। इसी श्रृंखला में, कन्नड़ भाषा की पुस्तक का नाम कर्नाटक की जीवनरेखा मानी जाने वाली कृष्णा नदी पर रखा गया है। बोर्ड का कहना है कि यह निर्णय पूर्णतः सांस्कृतिक और स्थानीय जुड़ाव को प्राथमिकता देने के लिए लिया गया है।

खान-पान और संतुलित आहार का सच

किताब के छठे अध्याय में संतुलित आहार को लेकर दिए गए कंटेंट पर उठे सवालों का जवाब देते हुए NCERT ने कहा कि इसका उद्देश्य केवल स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाना है।

अध्याय की शुरुआत हेल्थ इज वेल्थ से होती है, जिसमें व्यायाम और साफ-सफाई के महत्व को समझाया गया है। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि पेज नंबर 63 पर संतुलित आहार के लिए जो चित्र (Image) दिया गया है, उसमें शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह के भोजन शामिल हैं।

किसी विशेष खान-पान को बढ़ावा नहीं

NCERT ने सख्ती से इन दावों को खारिज किया है कि किताब में किसी विशेष प्रकार के भोजन का समर्थन या विरोध किया गया है। बोर्ड ने कहा कि पूरी पाठ्यपुस्तक में कहीं भी मांसाहार के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं है।

अध्याय का एकमात्र लक्ष्य छात्रों को पोषण के प्रति जागरूक करना और भारत के विभिन्न राज्यों के पारंपरिक खान-पान की विविधता से परिचित कराना है।

सुधार के लिए सुझावों का स्वागत

शिक्षा बोर्ड ने कहा है कि वह छात्रों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षण सामग्री प्रदान करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। NCERT ने स्पष्ट किया है कि वह शिक्षा नीति के लक्ष्यों को और बेहतर ढंग से लागू करने के लिए किसी भी रचनात्मक सुझाव या आलोचना का स्वागत करता है।

फिलहाल, इस सफाई के बाद विवाद को शांत करने का प्रयास किया गया है, ताकि शैक्षणिक सामग्री पर केंद्रित बहस को सही दिशा दी जा सके।

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