NCERT की नई किताब में आपातकाल का अध्याय, इतिहास पर घमासान
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एनसीईआरटी (NCERT) ने कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की नई किताब ‘अंडरस्टैंडिंग सोसायटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ में 1975-77 के आपातकाल को शामिल किया है। देश में आपातकाल के 50 साल पूरे होने के मौके पर यह पहली बार है जब स्कूली पाठ्यक्रम में इस दौर को इतने विस्तार से पढ़ाया जाएगा।

किताब में क्या है आपातकाल का ब्योरा?

नई किताब में आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है। इसमें इंदिरा गांधी सरकार के कार्यकाल, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और कुप्रबंधन का जिक्र है। पुस्तक में उल्लेख किया गया है कि जून 1975 में आंतरिक अशांति के नाम पर आपातकाल लागू किया गया था।

इसके साथ ही, किताब में प्रेस सेंसरशिप, मौलिक अधिकारों के निलंबन और बड़े पैमाने पर हुई राजनीतिक गिरफ्तारियों को लोकतंत्र के लिए गंभीर संकट के रूप में दर्शाया गया है। इसमें जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चले जन आंदोलनों की भूमिका को भी प्रमुखता से शामिल किया गया है।

लोकतंत्र की अन्य चुनौतियों पर भी जोर

यह अध्याय केवल आपातकाल तक सीमित नहीं है। इसमें फेक न्यूज, भ्रामक सूचनाएं, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान, गरीबी, क्षेत्रवाद और सामाजिक भेदभाव जैसे मुद्दों को शामिल किया गया है। इसके अलावा, एक नया सेक्शन डेमोक्रेसी एंड यू जोड़ा गया है, जो छात्रों को उनकी नागरिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करेगा।

भाजपा ने किया स्वागत

इस बदलाव का स्वागत करते हुए भाजपा नेताओं का कहना है कि नई पीढ़ी को इतिहास के इस दौर की पूरी जानकारी होनी चाहिए। दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद ने कहा, नई पीढ़ी को यह पता होना चाहिए कि अभिव्यक्ति की आजादी क्या है और घोषित तथा अघोषित आपातकाल में क्या अंतर होता है।

विपक्ष का तीखा प्रहार

वहीं, कांग्रेस और शिवसेना (UBT) ने इस कदम को राजनीति से प्रेरित करार दिया है। कांग्रेस नेता जयवर्धन सिंह ने आरोप लगाया कि भाजपा बच्चों की किताबों के जरिए केवल भ्रम फैलाने और अपना एजेंडा चलाने का काम कर रही है।

शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने कहा कि आपातकाल संविधान का हिस्सा है, लेकिन आज के दौर की स्थितियों पर भी चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि नोटबंदी और कोविड-19 के दौरान लगाए गए प्रतिबंधों को क्यों नहीं पढ़ाया जा रहा?

इस नए पाठ्यक्रम के साथ ही अब भारतीय इतिहास के इस संवेदनशील अध्याय पर स्कूली छात्रों के बीच बहस और चर्चा का एक नया दौर शुरू होना तय है।

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