धर्मांतरण पर नंदकुमार साय का बड़ा खुलासा: आदिवासी ही नहीं, अन्य समाज भी निशाने पर
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रायपुर। वरिष्ठ आदिवासी नेता नंदकुमार साय ने धर्मांतरण के मुद्दे पर गंभीर चिंता जताते हुए एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में धर्मांतरण का खेल केवल आदिवासी समाज तक सीमित नहीं है, बल्कि साहू समाज और अन्य समुदाय भी अब सुनियोजित तरीके से इसका शिकार हो रहे हैं।

सुनियोजित साजिश और कार्रवाई की चेतावनी साय के अनुसार, धर्मांतरण की यह प्रक्रिया बहुत गहरी साजिश के तहत संचालित की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे तत्वों के खिलाफ सरकार सख्त रुख अपनाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य के धर्मस्वातंत्र्य कानून का कड़ाई से पालन कराया जाएगा और धर्मांतरण में लिप्त लोगों पर हर हाल में कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

वीरांगना रानी दुर्गावती को दी श्रद्धांजलि हाल ही में वीरांगना महारानी दुर्गावती के शहादत दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में नंदकुमार साय शामिल हुए। रायपुर के कैनाल लिंकिंग रोड स्थित प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करते हुए उन्होंने कहा कि देश की स्वतंत्रता और स्वाभिमान के लिए रानी दुर्गावती का बलिदान हमेशा प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। इस दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और कई वरिष्ठ मंत्री भी उनके साथ मौजूद थे।

कौन हैं नंदकुमार साय? नंदकुमार साय छत्तीसगढ़ के कद्दावर आदिवासी चेहरे रहे हैं। किसान परिवार में जन्मे साय ने 1977 में राजनीति की शुरुआत की। वे तीन बार विधायक और तीन बार सांसद रहने के अलावा राज्यसभा सदस्य भी रहे हैं। छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद वे विधानसभा में पहले विपक्ष के नेता बने। कभी भाजपा के मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार रहे साय का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है। उन्हें केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग का अध्यक्ष भी बनाया गया था।

40 साल से नहीं खाया नमक नंदकुमार साय का एक बेहद दिलचस्प पहलू उनका संकल्प है। उन्होंने पिछले 40 वर्षों से नमक नहीं खाया है। यह संकल्प उन्होंने एक पदयात्रा के दौरान लिया था। एक आदिवासी ग्रामीण की बात से प्रभावित होकर उन्होंने समाज से शराब की लत को दूर करने के लिए खुद के खान-पान पर यह कठोर अनुशासन लागू किया था, जिसका वे आज भी पालन कर रहे हैं।

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