क्या बंगाल के स्कूलों में अब सिर्फ सात्विक भोजन? मिड-डे मील पर छिड़ी नई सियासी जंग
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में फिर से खान-पान और संस्कृति का मुद्दा गरमा गया है। इस बार केंद्र बिंदु है कोलकाता नगर निगम के स्कूलों में मिड-डे मील की जिम्मेदारी इस्कॉन (ISKCON) को सौंपा जाना। इस फैसले के बाद राज्य में राजनीतिक और सांस्कृतिक बहस छिड़ गई है।

इस्कॉन को मिली बड़ी जिम्मेदारी कोलकाता नगर निगम के अंतर्गत आने वाले लगभग 1,800 प्राइमरी और अपर प्राइमरी स्कूलों में आठवीं कक्षा तक पढ़ने वाले करीब एक लाख बच्चों के भोजन का जिम्मा अब इस्कॉन को दिया गया है। इस्कॉन अपनी रसोई में पूरी तरह शुद्ध शाकाहारी और सात्विक भोजन तैयार करने के लिए जानी जाती है।

अंडे पर सियासत की जड़ इस फैसले पर विपक्ष का सबसे बड़ा ऐतराज अंडे को लेकर है। अब तक मिड-डे मील में हफ्ते में एक दिन अंडा दिया जाता था। इस्कॉन के आने का मतलब है कि अब बच्चों को अंडा नहीं मिलेगा। विपक्ष का आरोप है कि बंगाल की खान-पान संस्कृति और मांसाहार को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।

प्रोटीन और पोषण का सवाल विपक्ष का यह भी सवाल है कि बच्चों को मिलने वाले प्रोटीन की कमी को कैसे पूरा किया जाएगा? हालांकि, इस्कॉन के पास इसका जवाब है। संस्था का कहना है कि दाल, सोयाबीन, राजमा और पनीर जैसे शाकाहारी विकल्पों से पोषण के मानकों को पूरा किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि शाकाहार बांग्ला संस्कृति के विरुद्ध नहीं है, क्योंकि बंगाल में गौड़ीय वैष्णव परंपरा सदियों पुरानी है।

इस्कॉन का ट्रैक रिकॉर्ड और बजट इस्कॉन कोई नई संस्था नहीं है। 2004 से उनका अन्नमित्र फाउंडेशन देश के 8 राज्यों के 22 शहरों में 12 लाख बच्चों को मिड-डे मील मुहैया करा रहा है। वहीं, शुभेंदु सरकार ने भी मिड-डे मील के प्रति बच्चे का बजट 6.78 रुपये से बढ़ाकर 10 रुपये कर दिया है। इस्कॉन का दावा है कि वे अपनी ओर से दानदाताओं की मदद से इस भोजन की लागत 10 रुपये से अधिक रखेगी।

पुराना है खान-पान का विवाद बंगाल में चुनाव के दौरान भी मछली-मांस का मुद्दा खूब उछला था। विपक्ष ने तब दावा किया था कि सत्ता में आने पर बीजेपी खान-पान पर पाबंदी लगा देगी। हालांकि, सरकार का कहना है कि उन्होंने मछली-भात योजना के तहत 400 कैंटीन के जरिए रियायती दरों पर मछली मुहैया कराई है।

अब देखना यह है कि इस्कॉन की नई विश्व स्तरीय रसोई और बच्चों के लिए तय किया गया नया मेन्यू इस सियासी घमासान को शांत कर पाएगा या यह विवाद और तूल पकड़ेगा।

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