महाराष्ट्र विधानसभा में एनसीपी (अजित पवार गुट) की विधायक सना मलिक के एक बयान ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। विधानसभा में ट्रिपल तलाक और समान नागरिक संहिता (UCC) पर चर्चा के दौरान सना मलिक ने धार्मिक कानूनों के समर्थन में तर्क दिए, जिसके बाद महायुति गठबंधन के भीतर ही वैचारिक मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।
कुरान के कानून की वकालत विधानसभा में चर्चा के दौरान सना मलिक ने कहा कि इस्लाम में जो कुरान कहता है, उसे ही वे मानती हैं। उन्होंने विवादित बयान देते हुए कहा, अगर कुरान की किसी बात को लागू करने के लिए पाकिस्तान ने नियम बनाया है, तो भारत को भी वैसा ही करना चाहिए। हम इसकी मांग करते हैं। उन्होंने ट्रिपल तलाक को लेकर सरकार द्वारा बनाए गए कानून पर भी सवाल उठाए।
नितेश राणे का तीखा पलटवार सना मलिक के इस बयान पर भाजपा विधायक और मंत्री नितेश राणे ने कड़ा आक्रोश जताया। उन्होंने कहा, देश बाबा साहेब अंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान से चलता है, न कि शरीयत या मुस्लिम लॉ बोर्ड से। जो लोग भारत में रहकर जिहाद और शरिया को बढ़ावा देना चाहते हैं, उन्हें जेल में डाल देना चाहिए।
राणे ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि किसी को भारत का संविधान और कानून मंजूर नहीं है, तो उन्हें देश छोड़कर पाकिस्तान चले जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता का उल्लेख संविधान में है, फिर भी कुछ लोग केवल अपने अवैध कार्यों को सही ठहराने के लिए संविधान का सहारा लेते हैं।
सदन में तीखी बहस सना मलिक के बयान पर भाजपा विधायक अतुल भातखलकर ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने सदन में दो टूक कहा, यह देश संविधान से चलता है, कुरान से नहीं। यहां पाकिस्तान की मिसाल देने या धार्मिक व्याख्याओं की आवश्यकता नहीं है।
इस पूरे घटनाक्रम में दिलचस्प पहलू यह रहा कि जहां भाजपा और शिंदे गुट के नेता सना मलिक के विरोध में खड़े दिखे, वहीं एनसीपी (अजित पवार गुट) के कुछ सदस्य उनके बचाव में उतर आए, जिससे गठबंधन के भीतर खींचतान के संकेत मिल रहे हैं।
यूसीसी पर अलग-अलग राय समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने स्पष्ट किया कि यूसीसी बालासाहेब ठाकरे का सपना रहा है और प्रधानमंत्री मोदी भी इसे लेकर गंभीर हैं। उन्होंने कहा कि देश में सभी को समान न्याय मिलना चाहिए।
वहीं, आदित्य ठाकरे ने इस मुद्दे को अलग दिशा देते हुए कहा कि कानूनों में समानता सिर्फ धर्म के नाम पर नहीं, बल्कि राजनीतिक और कानूनी जांच (जैसे ईडी-सीबीआई) और विकास निधि के वितरण में भी होनी चाहिए।
विवाद की असली जड़ यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब विधानसभा में मुस्लिम महिलाओं की सुरक्षा और ट्रिपल तलाक के कानून पर चर्चा चल रही थी। सना मलिक की मांग ने न केवल सत्ता पक्ष के भीतर दरारें उजागर की हैं, बल्कि देश में संविधान बनाम धार्मिक कानून की बहस को एक बार फिर से गर्मा दिया है।
“ हमारे देश में बाबा साहब अंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान ही चलता है ।
— ocean jain (@ocjain4) June 24, 2026
ये मुस्लिम लॉ बोर्ड फोर्ड को समाप्त कर देना चाहिए।
जो लोग भारत में रहकर शरिया कानून और जिहाद को बढ़ावा देना चाहते हैं
ऐसे सभी बोर्डों पर प्रतिबंध लगना चाहिए तथा उनके सदस्यों को उठा कर जेल में डालना चाहिए… pic.twitter.com/CzftLxchwD
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