सरियों से पीटते, चोकर की रोटी खिलाते : मुज़फ़्फ़रनगर में 12 बंधुआ मज़दूरों को नर्क से मिली आज़ादी
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उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर ज़िले के मांडी गांव में पुलिस और श्रम विभाग की एक संयुक्त कार्रवाई ने मानवता को शर्मसार कर देने वाले एक मामले का पर्दाफाश किया है। एक दोना बनाने वाली फ़ैक्ट्री से 12 बंधुआ मज़दूरों को मुक्त कराया गया है, जिन्हें वहां किसी जेल की तरह कैद करके रखा गया था।

कैदियों जैसा सलूक और बर्बरता मुक्त कराए गए मज़दूरों ने अपनी आपबीती में बताया कि उन्हें काम के बहाने फंसाकर फैक्ट्री लाया गया था। उनके मोबाइल छीन लिए गए और पहचान पत्र जला दिए गए ताकि वे कहीं जा न सकें। मज़दूरों ने बताया कि फ़ैक्ट्री मालिक अंकित बालियान और उसके साथी उन्हें भीषण प्रताड़ना देते थे। उन्हें लोहे की गर्म छड़ों, बेल्ट और डंडों से पीटा जाता था। खाने के नाम पर उन्हें केवल चोकर की रोटी और नमक-मिर्च दी जाती थी।

पसलियां टूटीं, मौत का भी अंदेशा मुज़फ़्फ़रनगर के एसएसपी संजय वर्मा ने बताया कि कई मज़दूरों के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान हैं। किसी की पसलियां टूटी हैं, तो किसी के कान और कमर पर गहरे घाव हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि पुलिस को ऐसी सूचनाएं मिली हैं कि इस बर्बरता के चलते पूर्व में कुछ मज़दूरों की मौत भी हो चुकी है। फ़ैक्ट्री परिसर में एक पिटबुल कुत्ता भी रखा गया था, ताकि मज़दूर डर के मारे भागने की हिम्मत न जुटा सकें।

कैसे फंसाया गया था मज़दूरों को? ये मज़दूर उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, राजस्थान, हरियाणा और नेपाल से ताल्लुक रखते हैं। इन्हें रेलवे और बस स्टेशनों से नौकरी और अच्छे वेतन का लालच देकर मुज़फ़्फ़रनगर लाया गया था। उत्तराखंड के रामू ने बताया कि उन्हें ढाई महीने पहले अंबाला से लाया गया था, जबकि नेपाल के दानबहादुर पिछले दो सालों से वहां बंधक थे। इस दौरान उनकी अपने परिवार से एक बार भी बात नहीं हो पाई।

कानूनी शिकंजा और मुख्य आरोपी फरार पुलिस ने इस मामले में दो अभियुक्तों, शिवा त्यागी और प्रदीप बालियान को गिरफ्तार कर लिया है। मुख्य सरगना अंकित बालियान अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है, जिसकी तलाश जारी है। अभियुक्तों पर बंधुआ मज़दूरी अधिनियम, बाल श्रम निषेध कानून और मारपीट की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

खामोश गांव और जांच का दायरा घटनास्थल पर मौजूद ग्रामीणों ने इस बारे में कोई भी जानकारी होने से इनकार किया है। फ़ैक्ट्री गांव के बाहरी इलाके में स्थित थी, जिससे वहां चल रहे अत्याचारों की भनक बाहर तक नहीं पहुंची। फिलहाल पुलिस सभी मुक्त कराए गए मज़दूरों के परिवारों से संपर्क कर रही है ताकि उन्हें सुरक्षित उनके घर वापस भेजा जा सके।

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