अब वीरांगना रानी दुर्गावती के नाम से जाना जाएगा जबलपुर; एयरपोर्ट और चिड़ियाघर का होगा कायाकल्प
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जबलपुर: मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक वीरांगना रानी दुर्गावती के 463वें बलिदान दिवस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बड़ा और ऐतिहासिक ऐलान किया है। जबलपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सीएम ने कहा कि अब जबलपुर एयरपोर्ट का नाम बदलकर वीरांगना रानी दुर्गावती एयरपोर्ट किया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार जल्द ही केंद्र के नागरिक उड्डयन मंत्रालय को प्रस्ताव भेजेगी।

श्रद्धांजलि और नमन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नर्रई नाला स्थित रानी दुर्गावती की समाधि स्थल पहुंचकर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने शहीद वीर नारायण की प्रतिमा पर माल्यार्पण भी किया। मुख्यमंत्री ने गोंड समाज के आराध्य देव बड़ा देव की पूजा-अर्चना कर उनके प्रति अपनी आस्था प्रकट की।

विरासत को सम्मान देने की पहल सीएम मोहन यादव ने कहा कि रानी दुर्गावती केवल मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि समूचे देश के लिए शौर्य और स्वाभिमान की प्रतीक हैं। उन्होंने बताया कि उनकी सरकार रानी दुर्गावती की विरासत को गौरव दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। कैबिनेट की पहली बैठक जबलपुर में आयोजित करना उनके सम्मान का ही प्रतीक था।

100 करोड़ का भव्य स्मारक मदन महल क्षेत्र में रानी दुर्गावती के जीवन पर आधारित एक अत्याधुनिक स्मारक का निर्माण किया जा रहा है। लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह संस्थान जल्द ही जनता को समर्पित किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को रानी के अद्भुत संघर्ष और गोंडवाना साम्राज्य की गौरवशाली गाथा से परिचित कराना है।

चिड़ियाघर और बटालियन को भी मिलेगी नई पहचान एयरपोर्ट के अलावा, जबलपुर के चिड़ियाघर और वन्य प्राणी रेस्क्यू सेंटर का नाम भी वीरांगना रानी दुर्गावती के नाम पर रखा जाएगा। इससे पहले मंडला की 35वीं बटालियन का नाम भी उनके नाम पर रखा जा चुका है।

किसान हितैषी थीं रानी दुर्गावती मुख्यमंत्री ने रानी दुर्गावती के प्रशासनिक कौशल को याद करते हुए बताया कि वे एक कुशल शासक थीं। उन्होंने अपने शासनकाल में बीज संरक्षण, फसल चक्र और जल संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए थे। उनके कुशल प्रबंधन के कारण ही गोंडवाना साम्राज्य उस समय अनाज के भंडारों से समृद्ध था।

विरासत से विकास का लक्ष्य अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरासत से विकास अभियान के तहत सरकार प्रदेश के महापुरुषों के इतिहास को संरक्षित कर रही है। ये प्रयास आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रभक्ति और साहस की प्रेरणा देने का काम करेंगे।

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