एशियन गेम्स 2026 के लिए भारतीय टेबल टेनिस टीम का ऐलान होते ही विवादों ने जोर पकड़ लिया है। कॉमनवेल्थ गेम्स की स्वर्ण पदक विजेता मनिका बत्रा को 10 सदस्यीय मुख्य टीम से बाहर कर रिजर्व खिलाड़ियों की सूची में रखा गया है। इस फैसले से नाराज मनिका ने टेबल टेनिस फेडरेशन ऑफ इंडिया (TTFI) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
मुझे दया नहीं, जवाब चाहिए मनिका बत्रा ने स्पष्ट किया है कि वह टीम में जगह की भीख नहीं मांग रही हैं, बल्कि उन्हें बाहर करने के पीछे का ठोस कारण जानना चाहती हैं। उन्होंने कहा, मैं सिर्फ पारदर्शिता और जवाब मांग रही हूं। अगर फेडरेशन मुझे स्पष्ट कारण नहीं बताता, तो मैं कानूनी रास्ता अख्तियार करने को मजबूर होंगी।
प्रधानमंत्री से की हस्तक्षेप की अपील इस पूरे मामले को लेकर मनिका ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और खेल मंत्री मनसुख मांडविया से न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा कि उनके साथ हुए इस व्यवहार की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। मनिका ने अपने करियर के 20 वर्षों का हवाला देते हुए कहा कि वह कोई नौसिखिया खिलाड़ी नहीं हैं जो भावुक होकर प्रतिक्रिया दे रही हैं, बल्कि वे व्यवस्था में सुधार चाहती हैं।
घरेलू टूर्नामेंट न खेलना बना कारण? TTFI का तर्क है कि एशियन गेम्स के लिए घरेलू राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेना अनिवार्य था, जिसमें मनिका शामिल नहीं हो पाई थीं। इस पर मनिका ने सफाई दी कि उनका अंतरराष्ट्रीय शेड्यूल बेहद व्यस्त था। उन्होंने तर्क दिया कि अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों और वर्ल्ड रैंकिंग (वर्तमान में 51वीं) को नजरअंदाज कर केवल घरेलू टूर्नामेंट के आधार पर चयन करना उचित नहीं है।
चयनकर्ताओं की योग्यता पर उठाए सवाल मनिका ने अपनी आलोचना में चयन समिति की पारदर्शिता पर भी बड़े सवाल दागे हैं। उन्होंने पूछा कि चयन करने वालों की खुद की अंतरराष्ट्रीय योग्यता क्या है? मनिका ने सवाल किया कि क्या उन्हें बाहर करने का फैसला प्रदर्शन के आधार पर लिया गया या यह किसी की व्यक्तिगत राय का परिणाम था। उन्होंने चयन समिति के सदस्यों के करियर रिकॉर्ड पर भी सार्वजनिक सवाल खड़े किए हैं।
दिग्गज खिलाड़ी शरत कमल का रुख एक तरफ मनिका अपनी लड़ाई लड़ रही हैं, वहीं भारतीय टेबल टेनिस के दिग्गज अचंता शरत कमल ने फेडरेशन के नियमों का समर्थन किया है। शरत कमल का मानना है कि नियम सभी खिलाड़ियों के लिए समान होने चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत की सबसे मजबूत टीम को ही एशियन गेम्स में उतारा जाना चाहिए, जिससे अब यह बहस छिड़ गई है कि क्या नियम बड़े खिलाड़ियों से ऊपर होने चाहिए।
Manika Batra: “I have represented India for almost twenty years. I am not an amateur athlete reacting emotionally to one selection decision. If I have chosen to raise my voice publicly, it is because I genuinely believe there are important questions that remain unanswered. I had… pic.twitter.com/ADPSRMUZQW
— IANS (@ians_india) June 24, 2026
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