आचार्य चाणक्य ने कहा था कि आने वाले संकट को समय रहते पहचान लेना ही एक सफल और बुद्धिमान शासन की पहचान है। लेकिन आज का हमारा सिस्टम इस नीति से कोसों दूर खड़ा है। लखनऊ में एक कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग में 15 होनहार छात्र जिंदा जल गए। क्या प्रशासन की नींद तब तक नहीं खुलती जब तक मातम न पसर जाए?
सिस्टम की ‘शीतनिद्रा’ और दिखावे का शोर करीब 20 दिन पहले दिल्ली के एक होटल में आग लगी थी, जिसके बाद सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे किए गए थे। कुछ दिन जांच की नौटंकी चली और फिर सिस्टम वापस अपनी गहरी नींद में सो गया। उस नींद का नतीजा आज लखनऊ के कोचिंग सेंटर में 15 चिरागों के बुझने के रूप में सामने आया है। अब फिर से वही पुराना ढर्रा चालू है—दिखावे की कार्रवाई, सीलिंग और गिरफ्तारियां। सवाल यह है कि यह फुर्ती हादसे से पहले क्यों नहीं दिखाई गई?
कागजों पर कार्रवाई, असलियत में कोताही लखनऊ के जिस सेंटर में यह हादसा हुआ, वहां की सच्चाई चौंकाने वाली है। 2014 से 2026 के बीच वहां 30 इंजीनियर और जोनल अधिकारी तैनात रहे। अगर उनमें से एक ने भी अपना फर्ज निभाया होता, तो क्या रिहायशी बिल्डिंग में नियम-कानूनों को ताक पर रखकर कोचिंग चलती? स्पष्ट है कि यह केवल एक हादसा नहीं, बल्कि सालों की प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम है।
हादसे के बाद सक्रियता का ‘स्वांग’ लखनऊ के बाद अब कानपुर, प्रयागराज और वाराणसी में कोचिंग सेंटर्स के खिलाफ बुलडोजर और सीलिंग की कार्रवाई हो रही है। फिजिक्स वाला और एलेन जैसे बड़े संस्थानों तक पर ताले लग रहे हैं। लेकिन सोचने वाली बात यह है कि ये इमारतें कल तक अवैध नहीं थीं क्या? ये संस्थान सालों से चल रहे थे, तब सिस्टम ने आंखें क्यों मूंद रखी थीं? स्पष्ट है कि यह जनता के आक्रोश को शांत करने की एक सोची-समझी लीपापोती है।
इतिहास गवाह है: जानबूझकर दी गई ढील लखनऊ की जिस बिल्डिंग में हादसा हुआ, उसे 10 मई 2016 को गिराने का आदेश दिया गया था। उस बिल्डिंग का नक्शा रिहायशी था, जिसे अवैध रूप से कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बना दिया गया था। लेकिन चमत्कार देखिए, महज दो महीने बाद यानी 5 जुलाई 2016 को इस आदेश को ही रद्द कर दिया गया। अगर तब ईमानदारी से कार्रवाई हुई होती, तो आज 15 परिवार अपने बच्चों को नहीं खोते।
क्या हादसे के बिना सुधार संभव नहीं? फिलहाल 6 लोगों के खिलाफ FIR हुई है, 4 गिरफ्तारियां हुई हैं और चार सरकारी अधिकारियों को सस्पेंड किया गया है। लेकिन क्या ये सस्पेंशन और गिरफ्तारियां उन बच्चों की जिंदगी लौटा सकती हैं? ये एक्शन सिर्फ इसलिए हो रहा है क्योंकि लोग मर चुके हैं। जब तक आग नहीं लगेगी, जब तक लाशें नहीं गिरेंगी, तब तक सिस्टम नहीं जागेगा—यही इस पूरे घटनाक्रम की सबसे कड़वी और शर्मनाक सच्चाई है।
*#DNAमित्रों |यूपी में सिस्टम जागा.. बाकी जगह क्यों सो रहा? जब तक लोग जलेंगे नहीं.. सिस्टम जागेगा नहीं!#DNA #DNAWithRahulSinha #Lucknow #CoachingCentre@rahulsinhatv pic.twitter.com/i0DfSNmJnP
— Zee News (@ZeeNews) June 23, 2026
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