इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने हाल ही में अपने बड़े भाई लेफ्टिनेंट कर्नल योनी नेतन्याहू को याद करते हुए उन्हें इसराइल का हीरो बताया। योनी नेतन्याहू की शहादत 50 साल पहले एक ऐसे ऑपरेशन के दौरान हुई थी, जिसे आज भी सैन्य इतिहास का सबसे साहसी रेस्क्यू मिशन माना जाता है। आइए जानते हैं क्या था ऑपरेशन एन्तेबे ।
घटना 27 जून 1976 की है। तेल अवीव से पेरिस जा रहे एयर फ्रांस के विमान को चार अपहरणकर्ताओं (दो फिलिस्तीनी और दो जर्मन) ने बंधक बना लिया। विमान में सवार यहूदी बंधकों को अलग कर, उन्होंने दुनिया भर की जेलों में बंद 54 फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई की मांग की। विमान को युगांडा के एन्तेबे हवाई अड्डे पर उतारा गया, जहाँ तानाशाह ईदी अमीन का शासन था।
एन्तेबे इसराइल से 4000 किलोमीटर दूर था, लेकिन मोसाद ने हार नहीं मानी। रिहा किए गए यात्रियों से पूछताछ की गई और हवाई अड्डे की सटीक जानकारी जुटाई गई। संयोग से, जिस टर्मिनल में बंधकों को रखा गया था, उसे एक इसराइली कंपनी ने ही बनाया था। कंपनी के नक्शे की मदद से इसराइल में एक नकली टर्मिनल बनाया गया, ताकि कमांडो हमले का अभ्यास कर सकें।
4 जुलाई 1976 को इसराइल के चार हरक्यूलिस विमानों ने उड़ान भरी। दुश्मन के रडार से बचने के लिए विमान केवल 30 मीटर की ऊंचाई पर उड़े। कमांडो युगांडा के सैनिकों की वर्दी में थे और उनके साथ ईदी अमीन जैसी दिखने वाली एक काली मर्सिडीज कार भी थी। उनकी योजना थी कि अमीन का काफिला समझकर युगांडा के सैनिक उन्हें जाने देंगे।
योजना में तब बाधा आई जब टर्मिनल के बाहर तैनात युगांडा के सैनिकों ने देखा कि इस बार अमीन की कार का रंग (सफेद) अलग है। सैनिकों ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसके बाद इसराइली कमांडो ने अपनी साइलेंसर लगी बंदूकों से जवाब दिया। टर्मिनल के अंदर घुसते ही कमांडो ने लाउडस्पीकर पर बंधकों को नीचे लेटने का आदेश दिया और चंद मिनटों में सभी अपहरणकर्ताओं को मार गिराया।
इस भीषण गोलाबारी के बीच, इसराइल का एक जांबाज सैनिक शहीद हो गया—लेफ्टिनेंट कर्नल योनाथन नेतन्याहू। उन पर कंट्रोल टावर से फायरिंग की गई थी। हालांकि, कमांडो ने अपना मिशन पूरा किया और 102 बंधकों को सुरक्षित विमान में बैठाकर वापस ले आए। एन्तेबे में लैंड करने के केवल 58 मिनट बाद, इसराइली विमान वापस उड़ान भर चुके थे।
इस मिशन को आज भी दुनिया भर की सैन्य अकादमियों में एक इंपॉसिबल मिशन को पॉसिबल बनाने के उदाहरण के तौर पर पढ़ाया जाता है।
לפני 50 שנה איבדתי את אחי הבכור, גיבור ישראל, סא״ל יוני נתניהו ז״ל.
— Benjamin Netanyahu - בנימין נתניהו (@netanyahu) June 21, 2026
היום באזכרה התחייבתי:
אני לא אתן לאיראן להתחמש בנשק גרעיני, ואנחנו נישאר ברצועת הביטחון בדרום לבנון ככל שיידרש כדי להגן על תושבי הצפון היקרים לנו ועל אזרחי המדינה כולה. pic.twitter.com/HD7tLVDzvG
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