स्विट्जरलैंड में शांति वार्ता का ड्रामा : ईरान के वॉकआउट से हैरान रह गए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शरीफ
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स्विट्जरलैंड के बर्गनस्टॉक रिजॉर्ट में चल रही हाई-लेवल शांति वार्ता के दौरान एक नाटकीय घटनाक्रम ने सभी को चौंका दिया। बैठक के बीच में ही ईरान का प्रतिनिधिमंडल अचानक उठकर बाहर चला गया, जिसे देखकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ बेहद हैरान और असहज नजर आए।

क्या हुआ उस दौरान? सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची पहले शरीफ से बातचीत के लिए आगे बढ़ते दिखते हैं, लेकिन कुछ ही पलों में पूरा ईरानी दल कमरे से बाहर निकल जाता है। इस अप्रत्याशित कदम से शरीफ हक्के-बक्के रह गए। उन्होंने तुरंत पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर को इशारा किया और फिर अपने प्रतिनिधिमंडल की ओर बढ़ गए। इस दौरान अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी वहीं मौजूद थे।

ट्रंप की धमकी बनी वॉकआउट की वजह यह विरोध प्रदर्शन डोनाल्ड ट्रंप की हालिया सोशल मीडिया पोस्ट के बाद हुआ। ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर ईरान ने लेबनान में अपने प्रॉक्सी गुटों को नहीं रोका, तो अमेरिका ईरान पर भारी हमला करेगा। ईरानी अधिकारियों ने इसे अमेरिका के साथ हुए मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) के आर्टिकल 1 का सीधा उल्लंघन बताया, जिसके तहत दोनों पक्ष बातचीत के दौरान एक-दूसरे को धमकी नहीं देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

अमेरिका को मीडिया शो करार दिया तनाव इस कदर बढ़ा कि ईरान ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के साथ तय संयुक्त फोटो सेशन का भी बहिष्कार कर दिया। ईरानी अधिकारियों ने इसे अमेरिका का महज एक मीडिया शो करार देते हुए कहा कि ट्रंप की सार्वजनिक धमकियों ने आपसी विश्वास को पूरी तरह खत्म कर दिया है।

कूटनीतिक गलियारों में हलचल इस घटनाक्रम के दौरान एक और दिलचस्प बात देखने को मिली। कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी ने शरीफ का तो गर्मजोशी से स्वागत किया, लेकिन अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। इसे कूटनीतिक हलकों में वेंस के प्रति कतर की नाराजगी के तौर पर देखा जा रहा है।

मिडिल ईस्ट में शांति की कोशिशें जारी तमाम विवादों और वॉकआउट के बावजूद, चार पक्षीय बैठक का मुख्य एजेंडा मिडिल ईस्ट में जारी जंग को खत्म करना है। अमेरिका, ईरान, पाकिस्तान और कतर के प्रतिनिधि इस क्षेत्र में शांति बहाली के लिए एक डील की कोशिश में जुटे हैं। देखना यह है कि ट्रंप की तीखी बयानों और ईरान के कड़े रुख के बीच यह शांति वार्ता किसी ठोस नतीजे तक पहुंच पाती है या नहीं।

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