बहराइच की सालार मसूद दरगाह में वित्तीय गड़बड़ी का बड़ा मामला: चढ़ावे का 10 साल का हिसाब गायब, पूर्व मंत्री का नाम उछला
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उत्तर प्रदेश के बहराइच स्थित प्रसिद्ध सालार मसूद दरगाह एक बड़े वित्तीय विवाद के घेरे में आ गई है। दरगाह पर पिछले 10 वर्षों में चढ़ाए गए दान, सोना-चांदी और नकदी का कोई स्पष्ट हिसाब-किताब नहीं मिल रहा है। इस मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है और अब बड़े घोटाले की आशंका जताई जा रही है।

क्या है पूरा मामला? बहराइच की यह दरगाह देश भर में आस्था का केंद्र है, जहाँ लाखों श्रद्धालु नकद दान और कीमती वस्तुएँ अर्पित करते हैं। हाल ही में दरगाह के प्रबंधन और वित्तीय रिकॉर्ड पर सवाल खड़े हुए। जब जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने दरगाह के वित्तीय ब्योरे की मांग की, तो चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि पिछले एक दशक का रिकॉर्ड ही गायब है।

भाजपा का हमला और SIT जांच की मांग भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष कुंवर बासित अली ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर इस मामले की एसआईटी (SIT) जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि वक्फ नंबर-19 की बेशकीमती संपत्तियों और दरगाह के चढ़ावे में करोड़ों रुपये की हेराफेरी की गई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि दान में आए कीमती सोने-चांदी के आभूषण अब गायब हैं।

पूर्व मंत्री पर भी गंभीर आरोप इस विवाद में समाजवादी पार्टी के पूर्व कैबिनेट मंत्री यासर शाह का नाम भी सामने आया है। भाजपा नेताओं का आरोप है कि दरगाह इंतजामिया कमेटी के साथ मिलकर पूर्व मंत्री ने इन वित्तीय अनियमितताओं को संरक्षण दिया है। कुंवर बासित अली ने मांग की है कि पिछले 20 वर्षों के लेन-देन की निष्पक्ष जांच हो ताकि सच सामने आ सके।

प्रशासन सख्त: 15 दिन में रिपोर्ट तलब मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार के प्रभारी मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने जिलाधिकारी को निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने 15 दिनों के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपने को कहा है। जिलाधिकारी ने इस संबंध में उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड को भी पत्र लिखकर मामले की गंभीरता से अवगत कराया है।

कमेटी का पक्ष: आरोपों को नकारा इधर, दरगाह इंतजामिया कमेटी ने सभी आरोपों को बेबुनियाद और निराधार बताया है। कमेटी के वरिष्ठ सदस्य एडवोकेट दिलशाद अहमद का कहना है कि हर लेनदेन वक्फ बोर्ड के नियमों के तहत होता है। उन्होंने दावा किया कि चढ़ावे की गिनती सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में की जाती है, इसलिए हेराफेरी मुमकिन नहीं है।

विवादों से पुराना नाता सालार मसूद दरगाह का विवादों से पुराना नाता रहा है। साल 2025 में उर्स और मेले को लेकर प्रशासन और कमेटी के बीच ठन गई थी, जिसका मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा था। वहीं, जून 2026 में मंत्री अनिल राजभर द्वारा दरगाह परिसर के एएसआई (ASI) सर्वे की मांग के बाद यह स्थल फिर से सुर्खियों में है। अब देखना यह है कि 15 दिन बाद आने वाली जांच रिपोर्ट में क्या सच सामने आता है।

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