कीर स्टारमर का इस्तीफा: ब्रिटेन की सियासत में बड़ा भूचाल, 100 से ज्यादा सांसदों के बागी तेवरों से झुकी सरकार
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ब्रिटेन की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने सोमवार को भावुक संबोधन में लेबर पार्टी के नेता और देश के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर अपनी बात रखते हुए स्टारमर की आवाज भर्रा गई और उनकी आंखों में आंसू साफ देखे जा सकते थे।

सांसदों के दबाव में लिया फैसला स्टारमर ने स्पष्ट किया कि वह अपनी पार्टी के सांसदों की इच्छा का सम्मान करते हुए यह कदम उठा रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जब तक नया नेता नहीं चुना जाता, वह कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभालते रहेंगे ताकि सत्ता का हस्तांतरण व्यवस्थित तरीके से हो सके।

क्यों आई यह नौबत? 63 वर्षीय कीर स्टारमर ने 2024 में लेबर पार्टी को प्रचंड बहुमत दिलाया था, लेकिन सरकार बनने के बाद से ही आर्थिक संकट और गिरती लोकप्रियता ने पार्टी के भीतर असंतोष पैदा कर दिया। हाल ही में एंडी बर्नहम की संसदीय उपचुनाव में जीत ने स्टारमर के नेतृत्व पर सवाल खड़े कर दिए। करीब एक चौथाई सांसदों ने खुलेआम उनके इस्तीफे की मांग कर दी थी, जिससे उनके पास पद छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।

अब परिवार को देंगे समय विदाई भाषण में स्टारमर ने कहा कि सार्वजनिक जीवन की जिम्मेदारियों के चलते वह अपने परिवार को समय नहीं दे पा रहे थे। उन्होंने कहा, अब मैं अपनी पत्नी विक्टोरिया के लिए एक बेहतर पति और अपने बच्चों के लिए एक बेहतर पिता बनने की जिम्मेदारी निभाऊंगा। उन्होंने किंग चार्ल्स तृतीय को भी अपने फैसले से अवगत करा दिया है।

कानूनी विशेषज्ञ से सत्ता के शिखर तक राजनीति में आने से पहले स्टारमर एक प्रतिष्ठित वकील थे। मानवाधिकारों की रक्षा और कानून व्यवस्था के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें 2014 में नाइटहुड की उपाधि दी गई थी। वे 2015 में सांसद बने और 2020 में लेबर पार्टी की कमान संभाली।

ब्रिटेन में अब कौन होगा नया प्रधानमंत्री? स्टारमर का इस्तीफा ब्रिटेन में पिछले एक दशक में सातवें नेता के आने का मार्ग प्रशस्त करता है। लेबर पार्टी में नए नेता के चुनाव की प्रक्रिया जुलाई से शुरू होगी और सितंबर तक नए पीएम का नाम तय हो जाएगा। फिलहाल एंडी बर्नहम इस रेस में सबसे आगे चल रहे हैं। नए प्रधानमंत्री के सामने देश की चरमराई अर्थव्यवस्था को संभालना और जनता का खोया हुआ भरोसा दोबारा जीतना सबसे बड़ी चुनौती होगी।

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