स्विट्जरलैंड में अमेरिका-ईरान की महा-बैठक : क्या थमेगा तनाव या फिर बढ़ेगा परमाणु संकट?
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स्विट्जरलैंड के बुर्गेनस्टॉक स्थित एक लग्जरी होटल में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए बातचीत का नया दौर शुरू हो चुका है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ईरानी प्रतिनिधिमंडल के साथ आमने-सामने हैं। इस बैठक का मुख्य आधार हाल ही में हस्ताक्षरित 14-सूत्रीय शांति समझौता है।

परमाणु ठिकानों की निगरानी पर अड़ा अमेरिका अमेरिकी टीम का सबसे बड़ा फोकस ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर है। वाशिंगटन चाहता है कि संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय निरीक्षक ईरान की उन परमाणु सुविधाओं का दौरा करें, जिन पर पिछले साल हमला हुआ था। अमेरिका का स्पष्ट रुख है कि जब तक ईरान परमाणु गतिविधियों और यूरेनियम संवर्धन पर पूरी पारदर्शिता नहीं बरतता, तब तक प्रतिबंधों में ढील देना संभव नहीं है।

तेहरान की कड़ी शर्तें ईरान ने बातचीत की मेज पर अपनी मांगें स्पष्ट कर दी हैं। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघेई ने कहा कि लेबनान में इजरायली हमले रुकना उनकी प्राथमिकता है। ईरान का आरोप है कि अमेरिका लेबनान में सीजफायर लागू कराने में नाकाम रहा है, जो शांति समझौते की पहली शर्त थी। साथ ही, ईरान तेल निर्यात पर लगी पाबंदियां हटाने और कतर के बैंकों में फंसे अपने 6 अरब डॉलर की राशि को तुरंत रिलीज करने की मांग कर रहा है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य बना फ्लैशपॉइंट दोनों देशों के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी खींचतान जारी है। लेबनान मुद्दे पर विरोध जताते हुए ईरान ने इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को बंद करने की धमकी दी है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे लेकर ईरान को सख्त चेतावनी दी है। ट्रंप का कहना है कि जलमार्ग खुला रहेगा और अगर बातचीत विफल रहती है, तो अमेरिका ऐसे कदम उठाएगा जो ईरान के लिए नुकसानदेह होंगे।

60 दिन में निकलेगा समाधान? बैठक में व्यापारिक रास्तों को सुरक्षित बनाने और क्षेत्र में दशकों से चली आ रही दुश्मनी को कम करने पर सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है। राष्ट्रपति ट्रंप ने उम्मीद जताई है कि अगले 60 दिनों में इस कूटनीतिक प्रयास से कोई ठोस नतीजा निकल सकता है। अब पूरी दुनिया की नजरें स्विट्जरलैंड में हो रही इस चर्चा पर टिकी हैं कि क्या दोनों देश एक-दूसरे की शर्तों को मानकर युद्ध के साये को खत्म कर पाएंगे।

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