अररिया: बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए सख्त हुए डीएम, लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन का आदेश
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अररिया: जिले में बच्चों की सुरक्षा और उनके पुनर्वास को लेकर प्रशासन अब बेहद सख्त हो गया है। हाल ही में समाहरणालय के आत्मन सभागार में आयोजित जिला बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति की उच्च स्तरीय बैठक में जिलाधिकारी विनोद दूहन ने स्पष्ट कर दिया है कि बाल सुरक्षा से जुड़े किसी भी मामले में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

किशोर न्याय परिषद (JJB) के लंबित मामलों पर नाराजगी बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने जेजेबी में लंबित मामलों के समय पर निष्पादन न होने पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने पुलिस अधीक्षक के प्रतिनिधि को सख्त निर्देश दिए कि थाना-वार लंबित मामलों की सूची तैयार की जाए। साथ ही, थानों को निर्देशित किया गया कि वे नियमित रूप से मामलों को जेजेबी के समक्ष प्रस्तुत करें ताकि बच्चों को त्वरित न्याय मिल सके।

पॉक्सो एक्ट और सुरक्षा व्यवस्था महिला एवं बाल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत दर्ज मामलों की समीक्षा की गई। डीएम ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रपत्र-बी (Form-B) को सही तरीके से भरकर तय समय-सीमा के भीतर बाल कल्याण समिति (CWC) को सौंपा जाए। वहीं, पर्यवेक्षण गृह की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए वहां अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने के निर्देश दिए गए हैं।

बाल श्रमिकों का होगा सामाजिक पुनर्वास बाल श्रम उन्मूलन पर जोर देते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि बच्चों को केवल मुक्त कराना ही काफी नहीं है। श्रम अधीक्षक को निर्देश दिए गए हैं कि रेस्क्यू किए गए बच्चों को सरकारी योजनाओं से जोड़कर उनका प्रभावी पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए। वहीं, जिला शिक्षा पदाधिकारी को इन बच्चों का स्थानीय स्कूलों और मदरसों में तुरंत नामांकन कराने को कहा गया है, ताकि शिक्षा की मुख्यधारा से कोई बच्चा न छूटे।

परवरिश योजना का दायरा बढ़ाएगी सरकार जिला प्रोग्राम पदाधिकारी (ICDS) को विशेष अभियान चलाकर परवरिश योजना के लाभार्थियों की संख्या बढ़ाने का टास्क दिया गया है। डीएम ने कहा कि ग्रामीण स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार कर अनाथ और बेसहारा बच्चों की पहचान की जाए और उन्हें लाभ प्रदान किया जाए।

पड़ोसी जिलों के मामलों की भी निगरानी बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि कटिहार और सुपौल के बाल सुधार गृहों में रह रहे अररिया के बच्चों की स्थिति का तकनीकी आकलन किया जाएगा। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बच्चों के पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी तरह संवेदनशील और समयबद्ध होनी चाहिए, ताकि इन्हें समाज की मुख्यधारा में वापस लाया जा सके।

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