IIT का अनोखा फरमान: रिज्यूमे से JEE-GATE रैंक हटाने के निर्देश, छिड़ी मेरिट बनाम समानता की जंग
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देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों (IITs) में प्लेसमेंट और इंटर्नशिप सीजन शुरू होने से पहले एक विवादास्पद निर्देश ने सोशल मीडिया पर खलबली मचा दी है। ऑल आईआईटी प्लेसमेंट कमेटी (AIPC) की एक कथित एडवाइजरी वायरल हो रही है, जिसमें छात्रों को अपने रिज्यूमे से जेईई (JEE) और गेट (GATE) जैसी कठिन परीक्षाओं की रैंक, मार्क्स और पर्सेंटाइल हटाने की सख्त सलाह दी गई है।

क्या है वायरल एडवाइजरी और नियम? सामने आए संदेश के मुताबिक, छात्रों से कहा गया है कि वे आगामी प्लेसमेंट साइकिल के लिए अपने रिज्यूमे को दोबारा जांचें और उसमें से किसी भी तरह के प्रतियोगी परीक्षा के स्कोर या रैंक का उल्लेख न करें। संस्थान का तर्क है कि इसे सभी आईआईटी के बीच यूनिफॉर्मिटी (समानता) बनाए रखने के लिए अनिवार्य किया गया है। इसे एक कंप्लायंस रिक्वायरमेंट के रूप में देखा जा रहा है।

मेधावी छात्रों का कड़ा विरोध सोशल मीडिया पर इस फैसले को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। आलोचकों का मानना है कि जो संस्थान खुद देश की सबसे कठिन प्रवेश परीक्षाओं पर आधारित हैं, वहां अपनी ही मेहनत के आंकड़ों को छिपाने के लिए कहना योग्यता की सेंसरशिप है। छात्रों का कहना है कि उनकी बरसों की कड़ी तपस्या का नतीजा उनकी रैंक है, जिसे छिपाना उनकी उपलब्धि को कम करने जैसा है।

समर्थकों का तर्क: हुनर को मिले तरजीह इस कदम का समर्थन करने वाले कुछ पूर्व छात्रों और विशेषज्ञों का कहना है कि यह नियम सही दिशा में है। उनका तर्क है कि कंपनियों को छात्र की 17 साल की उम्र वाली परीक्षा के बजाय कॉलेज के 4 वर्षों के दौरान सीखे गए कौशल और प्रोजेक्ट्स पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। समर्थकों का मानना है कि इससे रिज्यूमे अधिक फोकस्ड बनेगा और रिक्रूटर्स किसी पुरानी रैंक के बजाय वर्तमान काबिलियत को प्राथमिकता देंगे।

आरक्षण और हायरिंग पर विवाद इस एडवाइजरी ने आरक्षण और हायरिंग के संवेदनशील मुद्दे को भी फिर से हवा दे दी है। एक खेमा इसे उन छात्रों के लिए बराबरी का मौका मान रहा है जो किसी कारणवश रैंक की दौड़ में पीछे रह गए थे। वहीं, दूसरा पक्ष इसे अतार्किक बताते हुए दावा कर रहा है कि कंपनियां कोडिंग टेस्ट, इंटरव्यू और जीपीए के जरिए छात्र की असल प्रतिभा को पहचान ही लेंगी, इसलिए रैंक छुपाना केवल खानापूर्ति है।

फिलहाल, इस मामले पर AIPC की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन सोशल मीडिया पर समानता बनाम योग्यता की यह बहस लगातार जोर पकड़ रही है।

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