आत्मसम्मान गया तो बचीं केवल जिंदा लाशें : उद्धव के समर्थन में उतरे राज ठाकरे, महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल
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मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी तूफान खड़ा हो गया है। शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों की बगावत के बीच मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने अपने चचेरे भाई उद्धव ठाकरे का अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन किया है। राज ठाकरे ने सत्ता के लिए बदले जा रहे वफादारों पर करारा प्रहार किया है।

राजनीतिक नैतिकता पर सवाल मुंबई में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए राज ठाकरे ने कहा, राजनीतिक लाभ के लिए निर्वाचित प्रतिनिधियों को बांटने का खेल चल रहा है। सत्ता की हवस में पार्टियां महाराष्ट्र की परंपरा और इतिहास को भूल गई हैं। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा, पुरानी कहावत है—जब आत्मसम्मान मर जाता है, तो केवल जिंदा लाशें ही बचती हैं।

वोट और समर्थन के बीच का अंतर राज ठाकरे ने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को चेताया कि वे चुनावी रणनीतियों को गंभीरता से लें। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा, हमारे आंदोलन लोगों के घरों तक तो पहुंचते हैं, लेकिन वे वोट में तब्दील नहीं होते। क्या हमें इस बात का एहसास है कि हमारे चारों ओर कैसी साजिशें बुनी जा रही हैं?

उद्धव ठाकरे की चुनौती और बगावत शिवसेना (यूबीटी) के भीतर यह संकट तब गहराया जब पार्टी के नौ में से छह लोकसभा सांसदों ने व्हिप का उल्लंघन करते हुए महत्वपूर्ण बैठक से दूरी बना ली। इसके जवाब में उद्धव ठाकरे ने भावुक होते हुए कहा है कि वे पार्टी को चोरों और गद्दारों के हाथों में नहीं जाने देंगे। उन्होंने कार्यकर्ताओं से स्पष्ट कहा कि यदि उनका उन पर से विश्वास उठ गया है, तो वे अध्यक्ष पद छोड़ने को तैयार हैं।

अनुशासनात्मक कार्रवाई की तैयारी पार्टी ने बागी सांसदों नागेश आष्टिकर, संजय जाधव, संजय देशमुख, संजय दीना पाटिल, ओमप्रकाश राजेनिम्बालकर और भाऊसाहेब वाकचौरे को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इन नेताओं को 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण देना होगा, अन्यथा उन पर अयोग्यता की कार्यवाही की जा सकती है।

क्या फिर टूटेगी शिवसेना? 2022 के बाद पार्टी में यह दूसरी बड़ी बगावत है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे के बीच चल रही जुबानी जंग अब और तेज हो गई है। एक तरफ आरोप-प्रत्यारोप का ट्रेलर चल रहा है, तो दूसरी तरफ महाराष्ट्र की जनता के मुख्य मुद्दे गौण होते जा रहे हैं। देखना होगा कि यह सियासी खींचतान राज्य की राजनीति को किस मोड़ पर ले जाती है।

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