योग की वैश्विक गूंज: रूस से नेपाल तक PM मोदी के प्रयासों की सराहना, दुनिया ने माना भारत का लोहा
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अंतरराष्ट्रीय डेस्क। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) के उपलक्ष्य में पूरी दुनिया में योग की लहर है। इस बार रूस से लेकर नेपाल तक भारत की इस प्राचीन विद्या को न केवल सराहा जा रहा है, बल्कि इसे स्वास्थ्य और जीवनशैली का अभिन्न अंग माना जा रहा है।

रूसी दूतावास का विशेष आभार नई दिल्ली स्थित रूसी दूतावास में योग दिवस से पहले एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया। इस दौरान रूस की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया गया।

रूसी राजदूत डेनिस अलीपोव की पत्नी डायना अलीपोवा ने कहा, मैं पीएम मोदी की आभारी हूं कि उन्होंने योग को वैश्विक मंच पर पहुंचाया। योग को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने और अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की स्थापना में उनकी भूमिका निर्णायक रही है।

रूस में बढ़ती योग की लोकप्रियता रूसी दूतावास में संस्कृति मामलों की काउंसलर यूलिया आर्याएवा ने बताया कि मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग जैसे शहरों में योग की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। रूसी नागरिक योग को गहराई से समझने के लिए भारत की यात्रा कर रहे हैं, जो दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों की मजबूती का प्रमाण है।

बुद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी में योग का संदेश नेपाल की पवित्र नगरी लुंबिनी में भी भारत-नेपाल मैत्री का अद्भुत उदाहरण देखने को मिला। भारतीय दूतावास, लुंबिनी डेवलपमेंट ट्रस्ट और बीपी कोइराला इंडिया-नेपाल फाउंडेशन के सहयोग से एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया।

नेपाल में भारतीय दूतावास के प्रथम सचिव नारायण सिंह ने कहा कि बुद्ध की जन्मस्थली पर योग का आयोजन भारत की आध्यात्मिक विरासत को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है।

कैसे शुरू हुआ योग का यह वैश्विक सफर? प्रधानमंत्री मोदी ने 27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में योग दिवस का प्रस्ताव रखा था। भारत के इस प्रस्ताव को 177 देशों का अभूतपूर्व समर्थन मिला। नतीजतन, 11 दिसंबर 2014 को यूएन ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में घोषित किया। 2015 में पहली बार दुनिया ने एक साथ योग दिवस मनाया था।

2026 की थीम: स्वस्थ जीवन का मंत्र अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का यह 12वां संस्करण है। इस वर्ष की थीम Yoga for Healthy Ageing रखी गई है। इसका मुख्य उद्देश्य सभी आयु वर्ग के लोगों को स्वस्थ, सक्रिय और आत्मनिर्भर जीवन शैली के लिए प्रेरित करना है।

रूस और नेपाल जैसे देशों में आयोजित ये कार्यक्रम स्पष्ट करते हैं कि योग आज केवल एक व्यायाम नहीं, बल्कि भारत की सॉफ्ट पावर का सबसे शक्तिशाली और प्रभावी माध्यम बन चुका है।

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