एमपी में विकास का महा-मॉडल : 16 हजार वर्ग किमी में फैलेगा UIMR, 5 लाख युवाओं को मिलेगा रोजगार
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मध्यप्रदेश सरकार ने विकसित भारत @2047 के विजन को धरातल पर उतारने के लिए एक बड़े मास्टर प्लान पर काम शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यूनिफाइड इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन (UIMR) की घोषणा की है, जो प्रदेश के औद्योगिक और आर्थिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल देगा।

16 हजार वर्ग किमी का विशाल दायरा UIMR का विस्तार 6 जिलों (इंदौर, उज्जैन, देवास, धार, रतलाम और शाजापुर) तक होगा। इसमें 38 तहसीलें और 2781 गांवों को शामिल किया गया है। यह परियोजना केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ग्रामीण अंचलों में भी आधुनिक बुनियादी सुविधाएं और कनेक्टिविटी पहुंचाएगी।

60 मिनट कनेक्टिविटी का विजन इस पूरे क्षेत्र की सबसे बड़ी खासियत 60 मिनट एक्सेस मॉडल है। सरकार ऐसी परिवहन व्यवस्था विकसित कर रही है, जिससे इस विशाल क्षेत्र का कोई भी व्यक्ति एक घंटे के भीतर प्रमुख आर्थिक केंद्रों तक पहुंच सके। इसमें इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर और मेट्रो विस्तार जैसी परियोजनाएं प्रमुख हैं।

5 लाख नौकरियां और 14 नए औद्योगिक पार्क रोजगार सृजन इस योजना का मुख्य आधार है। सरकार 13,500 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर लैंड बैंक विकसित कर रही है। इसके साथ ही 14 नए औद्योगिक पार्क बनाए जाएंगे। अनुमान है कि इससे 5 लाख युवाओं को सीधे और परोक्ष रूप से रोजगार मिलेगा।

किसानों के लिए अनूठा लैंड पूलिंग मॉडल इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर में देश का सबसे अनूठा प्रयोग किया जा रहा है। यहाँ किसानों से ली गई जमीन के बदले उन्हें 60 प्रतिशत हिस्सा विकसित (developed) रूप में वापस दिया जाएगा। इससे किसान केवल जमीन मालिक नहीं, बल्कि विकास प्रक्रिया के सक्रिय भागीदार बनेंगे।

आर्थिक नोड्स और लॉजिस्टिक्स हब

पर्यावरण और पर्यटन पर विशेष फोकस सरकार ब्लू-ग्रीन डेवलपमेंट नीति अपना रही है, जिसके तहत औद्योगिक क्षेत्रों में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज अनिवार्य होगा। वहीं, उज्जैन, ओंकारेश्वर और मांडू जैसे धार्मिक स्थलों को जोड़कर एक विशाल पर्यटन सर्किट तैयार किया जाएगा, ताकि प्रदेश की जीडीपी में पर्यटन का योगदान 10 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सके।

डेटा-आधारित भविष्य की तैयारी अव्यवस्थित शहरीकरण से बचने के लिए मध्यप्रदेश महानगरीय क्षेत्र नियोजन एवं विकास अधिनियम-2025 के तहत एक सशक्त अथॉरिटी का गठन किया जाएगा। यह संस्था भविष्य की आबादी और यातायात की जरूरतों का वैज्ञानिक विश्लेषण कर योजनाएं लागू करेगी।

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