कोरोना का कच्चा चिट्ठा उजागर: फौसी पर तुलसी गबार्ड का बड़ा खुलासा, लैब में फंडिंग का सच आया सामने
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नई दिल्ली: अमेरिका की नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर तुलसी गबार्ड ने अपने कार्यकाल के अंतिम दिन एक ऐसा धमाका किया है, जिसने वैश्विक राजनीति और स्वास्थ्य जगत में खलबली मचा दी है। गबार्ड ने गोपनीय दस्तावेज जारी कर आरोप लगाया है कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के मेडिकल एडवाइजर डॉ. एंथोनी फौसी ने वुहान लैब को करोड़ों की फंडिंग दी थी।

फंडिंग और गेन ऑफ फंक्शन का खेल गबार्ड के खुलासे के अनुसार, डॉ. फौसी ने चीन की वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी को चमगादड़ कोरोनावायरस पर गेन ऑफ फंक्शन (Gain-of-Function) रिसर्च के लिए भारी-भरकम अमेरिकी टैक्सपेयर फंड उपलब्ध कराया था। माना जा रहा है कि यही वह घातक रिसर्च थी जिसके कारण महामारी ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में लिया।

सच्चाई छिपाने का डार्क प्लान गबार्ड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी वीडियो संदेश में कहा कि डॉ. फौसी ने इंटेलिजेंस कम्युनिटी के भीतर अपने राजनीतिक सहयोगियों के साथ मिलकर वायरस के लैब लीक होने की थ्योरी को दबाया। उन्होंने दावा किया कि फौसी ने न केवल जनता को अंधेरे में रखा, बल्कि 2024 में कांग्रेस के सामने भी झूठ बोला।

फार्मा कंपनियों को मुनाफा पहुँचाने की साजिश गबार्ड के आरोपों में एक और बड़ा पहलू सामने आया है। उनके मुताबिक, डॉ. फौसी ने अरबों-खरबों डॉलर के यूनिवर्सल वैक्सीन मार्केट और बड़ी फार्मा कंपनियों के मुनाफे को ध्यान में रखते हुए इस जोखिम भरी रिसर्च को प्रायोजित किया। यह सब एक सोची-समझी रणनीति के तहत किया गया ताकि वैक्सीन बाजार पर एकाधिकार बना रहे।

वैज्ञानिक सहमति के नाम पर फैलाया झूठ दस्तावेजों से पता चलता है कि फौसी ने प्रभावशाली वैज्ञानिकों का एक समूह तैयार किया, जिन्होंने कोरोना के प्राकृतिक उत्पत्ति (Natural Origin) का प्रोपेगेंडा फैलाया। इस रिपोर्ट को स्वतंत्र विज्ञान बताकर सार्वजनिक किया गया ताकि लैब लीक की संभावना को पूरी तरह से खारिज किया जा सके और फौसी का बचाव हो सके।

संसद से भी बोला झूठ? सबसे गंभीर आरोप फौसी द्वारा संसदीय कार्यवाही के दौरान झूठ बोलने का है। जून 2024 में जब डॉ. फौसी से पूछा गया था कि क्या उन्होंने कोरोना रिसर्च को लेकर खुफिया एजेंसियों के साथ कोई चर्चा की थी, तो उन्होंने इनकार किया था। नए दस्तावेजों ने उनके इस दावे को पूरी तरह से झुठला दिया है, जिससे आने वाले समय में उन पर कानूनी कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है।

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