मॉनसून की सुस्त चाल: कहीं भीषण गर्मी तो कहीं सैलाब, भारत के अलग-अलग चेहरों की हकीकत
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देश भर में इस बार मॉनसून की रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं रही है। जून का दूसरा और तीसरा सप्ताह बीत जाने के बावजूद, देश का एक बड़ा हिस्सा मॉनसून की पहली फुहार के लिए तरस रहा है। मौसम विभाग का कहना है कि यह केवल सामान्य देरी नहीं, बल्कि मॉनसून की एक असामान्य सुस्ती है।

दिल्ली में अभी और तपेगी दिल्ली राजधानी दिल्ली और एनसीआर में मॉनसून अभी भी कोसों दूर नजर आ रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले कुछ दिनों तक पारे में कोई बड़ी गिरावट नहीं आएगी। तापमान 40 से 42 डिग्री सेल्सियस के बीच बने रहने की संभावना है। हालांकि, बीच-बीच में धूल भरी आंधी या हल्की फुहारें हो सकती हैं, लेकिन भीषण गर्मी और उमस से फिलहाल कोई बड़ी राहत मिलती नहीं दिख रही है।

मुंबई के जलाशयों पर संकट के बादल मॉनसून की सुस्ती का असर मुंबई की जल आपूर्ति पर भी पड़ने लगा है। बीएमसी ने जल संकट की आशंका को देखते हुए पानी के भंडार को लेकर सख्त रुख अपनाया है। वर्तमान में शहर के पास 17 अगस्त तक का ही जल भंडार शेष है। बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिड़े ने चेतावनी दी है कि यदि बारिश में और देरी हुई, तो शहर में पानी की कटौती या गैर-जरूरी उपयोग पर सख्त पाबंदियां लागू की जा सकती हैं।

पूर्वोत्तर में प्रकृति का रौद्र रूप एक ओर जहां मध्य और उत्तर भारत पानी के लिए तरस रहे हैं, वहीं देश के पूर्वोत्तर राज्यों और कोलकाता में हालात बिल्कुल विपरीत हैं। असम, मेघालय, सिक्किम और पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में भारी बारिश के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। कोलकाता में हवाई अड्डे की ओर जाने वाली मुख्य सड़कों पर जलभराव के कारण यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई क्षेत्रों में भूस्खलन और बाढ़ जैसी स्थितियां चिंता का कारण बनी हुई हैं।

क्यों अटक गया है मॉनसून? विशेषज्ञों के अनुसार, मॉनसून के थमने के पीछे मुख्य रूप से पांच तकनीकी कारण जिम्मेदार हैं: अरब सागर से नमी वाली हवाओं का कमजोर होना, दक्षिण-पश्चिमी पवनों की कम ताकत, बंगाल की खाड़ी में कम दबाव के क्षेत्रों का न बन पाना, कमजोर क्रॉस-इक्वेटोरियल फ्लो और मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO) का प्रतिकूल होना।

राहत कब मिलेगी? फिलहाल मौसम विभाग ने ऐसी कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं दी है जिससे यह कहा जा सके कि मॉनसून कब तक रफ्तार पकड़ेगा। जब तक अरब सागर या बंगाल की खाड़ी में कोई मजबूत मौसमी प्रणाली विकसित नहीं होती, तब तक उत्तर और मध्य भारत को बारिश के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। फिलहाल देश एक साथ मौसम के दो चरम रूपों—हीट स्ट्रेस और भारी वर्षा—से जूझ रहा है।

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