पुणे के एक आलीशान इलाके का हाल जानकर आप दंग रह जाएंगे। यहाँ 1.5 करोड़ रुपये के फ्लैट में रहने वाले एक उद्यमी के नल से चॉकलेट जैसा मटमैला पानी निकल रहा है। यह कोई काल्पनिक कहानी नहीं, बल्कि शहर की बदहाल व्यवस्था का सच है।
वायरल तस्वीर ने खोली पोल डील्स धमाका के संस्थापक विनीत के. ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक तस्वीर साझा की है, जिसमें नल से भूरे रंग का गंदा पानी बहता दिख रहा है। विनीत ने तंज कसते हुए लिखा कि इसमें कोई प्रिजर्वेटिव नहीं मिलाया गया है, टैंकरों से मिलने वाले पानी का असली रंग यही है।
साल के 70 लाख खर्च, फिर भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव हैरानी की बात यह है कि विनीत की हाउसिंग सोसाइटी हर साल पानी के टैंकरों के लिए करीब 70 लाख रुपये का भारी-भरकम भुगतान करती है। डेढ़ करोड़ के आशियाने में रहने के बावजूद, यहां के निवासी बूंद-बूंद साफ पानी के लिए तरस रहे हैं। विनीत ने इसे बेहद दयनीय स्थिति करार दिया है।
जन-स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा विनीत ने चेतावनी दी है कि यह केवल असुविधा का मामला नहीं है, बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य महामारी की दस्तक है। दूषित पानी से त्वचा रोग और पेट की बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है। उन्होंने चिंता जताई कि अगर प्रीमियम सोसायटियों का यह हाल है, तो सड़कों के किनारे बिकने वाले खाने और छोटे होटलों में इस्तेमाल होने वाले पानी की गुणवत्ता का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।
सिस्टम पर फूटा जनता का गुस्सा इस पोस्ट के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। यूजर्स सवाल उठा रहे हैं कि आखिर टैक्स का पैसा कहाँ जा रहा है? कई लोगों ने पुणे के अनियंत्रित विस्तार पर निशाना साधा है, जहाँ कागजों पर तो गगनचुंबी इमारतें खड़ी हो गईं, लेकिन उन्हें बुनियादी संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए।
टैंकर माफिया के भरोसे शहर? पुणे के नए इलाकों में पानी की किल्लत और टैंकर माफिया का बढ़ता दबदबा एक गंभीर मुद्दा बन गया है। जब करोड़ों खर्च करने के बाद भी एक नागरिक को साफ पानी नसीब नहीं होता, तो यह सिस्टम की विफलता को साफ दर्शाता है। क्या आने वाले समय में साफ पानी एक लक्जरी बन जाएगा? यह सवाल आज हर पुणेवासी के मन में है।
*This is water 🚰 from our society this week
— Vineeth K (@DealsDhamaka) June 17, 2026
No added preservatives, that’s exactly the colour of water delivered by tankers
We pay ~70L every year for water tankers, if this is the situation for us … imagine what the restaurants and roadside eateries are getting
A silent… pic.twitter.com/ng4Flp6Ajv
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