शिवसेना के 60 साल: दो फाड़ हुई पार्टी, स्थापना दिवस पर टकराव के साये में शक्ति प्रदर्शन
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महाराष्ट्र की राजनीति में मराठी अस्मिता और हिंदुत्व का पर्याय रही बाल ठाकरे की शिवसेना आज अपने 60वें स्थापना दिवस के मौके पर दो खेमों में बंटी हुई है। एक ओर उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) है, तो दूसरी ओर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना है। दोनों गुटों ने अपनी ताकत दिखाने के लिए अलग-अलग कार्यक्रमों का आयोजन किया है।

मुंबई पुलिस का अलर्ट जारी स्थापना दिवस को लेकर मुंबई में तनाव का माहौल है। शिवसेना के दोनों गुटों के कार्यकर्ताओं के बीच संभावित टकराव, विरोध-प्रदर्शन और झड़प की आशंका को देखते हुए मुंबई पुलिस की स्पेशल ब्रांच ने हाई अलर्ट जारी किया है। गोरेगांव और सायन समेत संवेदनशील इलाकों में कड़ी निगरानी रखने और एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।

शिंदे गुट का आक्रामक रुख: शिवसेना को कांग्रेस नहीं बनने दूंगा एकनाथ शिंदे गुट ने एक आक्रामक टीजर जारी कर अपनी मंशा साफ कर दी है। इसमें बाला साहेब ठाकरे के प्रखर हिंदुत्ववादी बयानों को प्रमुखता दी गई है। टीजर में संदेश दिया गया है कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली पार्टी ही असली शिवसेना है , जहां कोई मालिक या नौकर नहीं, बल्कि सभी कार्यकर्ता हैं। शिंदे गुट बार-बार दोहरा रहा है कि वे पार्टी को कांग्रेस के रास्ते पर नहीं जाने देंगे।

बागी सांसदों की सावधानी भरी चुप्पी सस्पेंस इस बात पर बना हुआ है कि उद्धव ठाकरे गुट को छोड़कर बगावत करने वाले 6 सांसद क्या शिंदे गुट में शामिल होंगे? सूत्रों के मुताबिक, ये सांसद आज मंच पर नजर नहीं आएंगे। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये सांसद अभी किसी दूसरे मंच पर गए, तो दल-बदल कानून के तहत उनकी सदस्यता रद्द हो सकती है। लोकसभा स्पीकर के पास अलग गुट बनाने की प्रक्रिया अभी अधूरी है, इसलिए शिंदे गुट फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है।

जमीन पर बयानों और पोस्टरों की जंग हिंगोली के सांसद नागेश पाटिल के शिंदे गुट में जाने की चर्चाओं के बीच उनके क्षेत्र में सही फैसला लेने के लिए बधाई संदेश वाले पोस्टर लगाए गए हैं। वहीं दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे के प्रति निष्ठा रखने वाले सांसद राजाभाऊ वाजे का स्वागत फूलों की बारिश के साथ किया गया। वाजे ने स्पष्ट किया है कि वे उद्धव ठाकरे के साथ हैं और स्थापना दिवस कार्यक्रम में शामिल होंगे।

उद्धव-आदित्य की चुप्पी और राउत की चुनौती शिवसेना (UBT) के भीतर खामोशी और हलचल दोनों साथ-साथ चल रही हैं। जहां उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे की रणनीतिक चुप्पी चर्चा का विषय है, वहीं संजय राउत लगातार आक्रामक तेवर अपनाए हुए हैं। स्थापना दिवस का यह दिन तय करेगा कि बाला साहेब की विरासत पर पकड़ किसकी मजबूत है और महाराष्ट्र की राजनीति किस दिशा में मुड़ती है।

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