मेसी का जादू और स्कलोनी की रणनीति: क्या अर्जेंटीना फिर रचेगी इतिहास?
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फुटबॉल के मैदान पर 16 जून की तारीख ने यह साबित कर दिया कि एर्लिंग हालैंड और कीलियन एमबापे जैसे युवा सितारों के दौर में भी लियोनेल मेसी का जलवा कायम है। 39 साल की उम्र में मेसी का प्रदर्शन न केवल शानदार रहा, बल्कि यह भी संकेत दे दिया कि वह अभी भी खेल को बदलने का माद्दा रखते हैं। हालांकि, अर्जेंटीना की सफलता केवल मेसी पर निर्भर नहीं है, इसके पीछे लियोनेल नाम का एक और जादुई चेहरा है—कोच लियोनल स्कलोनी।

4-3-3 का फॉर्मेशन और मिडफील्ड का संतुलन

अल्जीरिया के खिलाफ अर्जेंटीना उसी 4-3-3 फॉर्मेशन में उतरी, जिसने उन्हें 2022 वर्ल्ड कप का चैंपियन बनाया था। स्कलोनी ने अपनी टीम में निरंतरता बनाए रखी है, जो उनकी कोचिंग फिलॉसफी का मुख्य आधार है। उनके मिडफील्ड में एंजो फर्नांडिस, एलेक्सिस मैक एलिस्टर और रॉड्रिगो डे पॉल की तिकड़ी खेल को नियंत्रित करती है। यह मिडफील्ड मेसी को रक्षात्मक जिम्मेदारी से मुक्त रखती है, जिससे वह अटैकिंग एरिया में स्पेस बनाने के लिए पूरी तरह आजाद रहते हैं।

अर्जेंटीना की ताकत: मेसी का विजन और ठोस डिफेंस

अर्जेंटीना की सबसे बड़ी ताकत मेसी का वह आई है, जिससे वे विपरीत टीम के डिफेंस में बारीक से बारीक गैप ढूंढ लेते हैं। बचाव में क्रिस्चियन रोमेरो और लिसांड्रो मार्टिनेज की जोड़ी काफी भरोसेमंद नजर आती है, जबकि एमिलियानो मार्टिनेज का गोल पोस्ट पर होना टीम के आत्मविश्वास को बढ़ाता है। बेंच पर निकोलस ओटामेंडी जैसे अनुभवी खिलाड़ी टीम की गहराई को और मजबूत करते हैं।

कहां फंस सकती है अर्जेंटीना?

बेहतरीन फॉर्म के बावजूद टीम की कुछ कमजोरियां भी हैं। सेंटर-बैक जोड़ी की गति (Speed) थोड़ी कम है, जिससे काउंटर-अटैक के दौरान टीम के लिए खतरा पैदा हो सकता है। अल्जीरिया के खिलाफ इसका नमूना दिखा जब एक गोल ऑफसाइड के चलते रद्द हुआ। इसके अलावा, रोमेरो का अनुशासनहीन होना (रेड कार्ड्स का इतिहास) और फुलबैक का अटैकिंग योगदान न दे पाना आगामी मैचों में कोच के लिए चिंता का विषय हो सकता है।

स्कलोनी की फ्लेक्सिबिलिटी: क्या होंगे बदलाव?

स्कलोनी एक ऐसे रणनीतिकार हैं जो मैच के दौरान बदलाव करने से नहीं हिचकिचाते। अगले मुकाबले में ऑस्ट्रिया के खिलाफ, जो एक आक्रामक फुटबॉल खेल रही है, स्कलोनी अपनी रणनीति में बदलाव कर सकते हैं। जूलियन अल्वारेज की वापसी और निको गोंजालेज को फ्लैंक पर खिलाना अटैक को और धार दे सकता है।

क्या लगातार दूसरी बार वर्ल्ड कप मुमकिन है?

इतिहास गवाह है कि लगातार दो बार वर्ल्ड कप जीतना बेहद कठिन है—ऐसा केवल इटली (1934, 1938) और ब्राजील (1958, 1962) ही कर पाए हैं। अर्जेंटीना के लिए भी राह आसान नहीं है, लेकिन इस बार की शुरुआत 2022 की तुलना में कहीं अधिक सकारात्मक है। दबाव मुक्त मेसी और एक व्यवस्थित टीम के साथ, अर्जेंटीना अगर आगे भी यही लय बरकरार रखती है, तो यह ग्रेटेस्ट ऑफ ऑल टाइम (GOAT) के ताज पर अंतिम मुहर हो सकती है।

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