होर्मुज खुला, $300 अरब का फंड और परमाणु हथियारों पर बैन! US-ईरान डील का पूरा मसौदा
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पिछले कई दिनों से जारी कयासों के बीच अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक समझौते का खाका सामने आ गया है। इस इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। शुक्रवार को इस पर आधिकारिक हस्ताक्षर होने की संभावना है, जिसके बाद दोनों देशों के पास अंतिम शर्तों को अंतिम रूप देने के लिए 60 दिनों का समय होगा।

इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन : शांति या बड़ा तूफ़ान?

इस समझौते का औपचारिक नाम संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के इस्लामी गणराज्य के बीच इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन है। जहां अमेरिका ने इस डील की जानकारी सार्वजनिक कर दी है, वहीं तेहरान की ओर से अभी भी चुप्पी बरकरार है। यह संधि स्थायी शांति लाएगी या महज एक दिखावा, यह आने वाले 60 दिनों में साफ हो जाएगा।

लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सीज़फ़ायर

इस डील का सबसे बड़ा और तत्काल प्रभाव युद्ध के मोर्चों पर दिखेगा। समझौते के अनुसार, लेबनान सहित सभी युद्धग्रस्त क्षेत्रों में सैन्य अभियानों को तुरंत और स्थायी रूप से रोकने का फरमान जारी किया गया है। यदि अगले 60 दिनों में अंतिम समझौता नहीं हो पाता है, तो यह पूरी कवायद विफल हो जाएगी।

होर्मुज जलडमरूमध्य से हटेगी नाकेबंदी

वैश्विक व्यापार की जीवनरेखा स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ को लेकर भी बड़ा बदलाव होगा। अमेरिका अगले 30 दिनों के भीतर ईरान की नौसैनिक नाकेबंदी को हटाने पर सहमत हो गया है। बदले में, ईरान अगले 60 दिनों तक सभी कमर्शियल जहाजों को बिना किसी शुल्क के सुरक्षित रास्ता देने का वादा करेगा। समझौते के बाद, अमेरिका ईरान के रणनीतिक क्षेत्रों से अपनी सेना भी हटा लेगा।

परमाणु हथियारों पर पूर्ण विराम

ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह छोड़ने पर सहमति जताई है। ईरान के पास मौजूद संवर्धित परमाणु सामग्री को इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) की निगरानी में एक सीक्रेट ऑपरेशन के तहत नष्ट (blending on site) किया जाएगा। यह कदम परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने की दिशा में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।

$300 अरब का फंड और प्रतिबंधों से मुक्ति

इस डील के बदले अमेरिका ईरान को आर्थिक रूप से उभारने जा रहा है। अमेरिका और उसके सहयोगी मिलकर ईरान के लिए $300 बिलियन (300 अरब डॉलर) का एक पुनर्निर्माण फंड तैयार करेंगे। साथ ही, ईरान की अर्थव्यवस्था को जकड़ने वाले सभी अमेरिकी प्रतिबंधों को हटा लिया जाएगा। इन प्रतिबंधों को हटाने का चरणबद्ध तरीका 60 दिनों की बातचीत के बाद तय किया जाएगा।

अब पूरी दुनिया की नजरें शुक्रवार को होने वाले हस्ताक्षरों पर टिकी हैं। क्या यह समझौता ईरान की किस्मत बदलेगा या यह डील बीच में ही बिखर जाएगी, यह समय ही बताएगा।

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