अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें: 6 दिन में तीसरी बार CID के सामने पेशी, ममता के घर मैराथन मंथन से बढ़ी हलचल
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय भूचाल आया हुआ है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी जांच एजेंसियों के जाल में बुरी तरह फंसते दिख रहे हैं। महज 6 दिनों के भीतर राज्य की जांच एजेंसी सीआईडी (CID) के दफ्तर भवानी भवन में उनका तीसरी बार तलब होना कई बड़े सवालों को जन्म दे रहा है।

जांच का चक्रव्यूह: आखिर क्यों हो रही है इतनी पूछताछ? अभिषेक बनर्जी इस समय दो प्रमुख कानूनी मामलों में घिरे हुए हैं, जिसकी वजह से पुलिस और सीआईडी उन पर लगातार दबाव बनाए हुए है:

  1. विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर: विधानसभा चुनाव के बाद एक आधिकारिक प्रस्ताव में टीएमसी विधायकों के जाली हस्ताक्षर का मामला सामने आया। आरोप है कि विधानसभा सचिवालय को सौंपे गए दस्तावेजों में विपक्ष के लिए आरक्षित अहम पदों पर नियुक्ति के लिए विधायकों के फर्जी दस्तखत किए गए थे।
  2. भड़काऊ बयानबाजी का केस: उत्तर 24 परगना के बागुईआटी थाने में दर्ज एक अन्य मामले में अभिषेक पर चुनावी रैलियों के दौरान कथित रूप से भड़काऊ और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाले बयान देने का आरोप है।

लगातार तीसरी बार तलब सीआईडी ने अभिषेक से पहली पूछताछ 11 जून को की थी, जो करीब साढ़े 5 घंटे चली। इसके बाद 14 जून को उनसे 8 घंटे से ज्यादा समय तक मैराथन पूछताछ हुई। वहीं, 16 जून को तीसरी बार उन्हें भवानी भवन बुलाया गया। जांच की यह रफ्तार बताती है कि एजेंसी किसी भी हाल में ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।

ममता-अभिषेक की आपात बैठक: क्या कोई बड़ा प्लान तैयार है? सीआईडी के दफ्तर से निकलने के तुरंत बाद अभिषेक बनर्जी सीधे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पहुंचे। जानकारों का मानना है कि यह महज पारिवारिक मुलाकात नहीं, बल्कि एक संकटकालीन बैठक है।

सूत्रों के मुताबिक, ममता और अभिषेक के बीच आगामी संसद सत्र और पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को लेकर चर्चा हुई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अपनी ही सरकार की एजेंसी द्वारा अभिषेक से इतनी सख्ताई से पूछताछ क्यों की जा रही है? क्या यह पार्टी के भीतर चल रहे पावर स्ट्रगल का संकेत है या फिर इसे विपक्ष के खिलाफ विक्टिम कार्ड के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारी है?

क्या अब बड़ा बदलाव होगा? एक तरफ केंद्र की ईडी (ED) स्कूल भर्ती मामले में अभिषेक को घेर रही है, तो दूसरी तरफ राज्य की सीआईडी का रुख पार्टी के अंदर कई तरह की चर्चाओं को हवा दे रहा है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ममता बनर्जी इस कानूनी घेराबंदी से निकलने के लिए पार्टी संगठन में कोई बड़ा फेरबदल करेंगी या आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति में कोई बड़ा तूफान देखने को मिलेगा। आने वाले कुछ दिन राज्य की राजनीति के लिए बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं।

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