राम मंदिर दान चोरी का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग
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अयोध्या के राम मंदिर में कथित दान चोरी और हेराफेरी का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट के वकील अनूप अवस्थी ने मुख्य न्यायाधीश (CJI) को एक पत्र याचिका भेजी है। इसमें मांग की गई है कि कोर्ट मामले का स्वत: संज्ञान ले और अपनी देखरेख में एक स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच के आदेश दे।

आस्था और पारदर्शिता पर सवाल याचिका में तर्क दिया गया है कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। चंदे में अनियमितताओं के आरोपों से भक्तों का विश्वास डगमगाया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि लोगों का भरोसा बहाल करने के लिए प्राथमिकी (FIR) दर्ज करना और कोर्ट की निगरानी में जांच होना अनिवार्य है।

राजनीतिक घमासान और SIT का गठन समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा राम मंदिर चंदे में चोरी का आरोप लगाने के बाद से राज्य की राजनीति गरमा गई है। विवाद को बढ़ता देख उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। इस टीम में लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं।

SIT पर अविश्वास, न्यास को हटाने की मांग SIT के गठन पर सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, राम मंदिर न्यास के मौजूदा सदस्यों को पदों से हटा देना चाहिए, ताकि वे जांच प्रक्रिया को प्रभावित न कर सकें। उन्होंने भी सरकार द्वारा बनाई गई SIT पर अविश्वास जताते हुए सुप्रीम कोर्ट के जजों से मामले की सुनवाई की अपील की है।

मंदिर निर्माण समिति का रुख राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने SIT गठन के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने त्वरित कार्रवाई करके दिखा दिया है कि वे मामले को लेकर गंभीर हैं। वहीं, राम मंदिर आंदोलन से जुड़े वरिष्ठ नेता विनय कटियार का कहना है कि यह अत्यंत गंभीर मामला है और इसकी बारीकी से जांच होनी चाहिए क्योंकि यह मंदिर लाखों लोगों के बलिदान और संघर्ष का परिणाम है।

जांच की तैयारी और न्यास की मुश्किलें SIT की टीम अयोध्या पहुंच चुकी है और सोमवार सुबह से जांच का काम शुरू होने की उम्मीद है। दूसरी ओर, मंदिर न्यास के लिए एक और मुश्किल खड़ी हो गई है। महासचिव चंपत राय अस्वस्थ हैं और उनका शुगर लेवल बढ़ा हुआ है, जबकि अन्य न्यासी अनिल मिश्रा मेडिकल कारणों से बाहर गए हैं। आने वाले दिनों में यह जांच मंदिर प्रबंधन और सरकार के लिए बड़ी अग्निपरीक्षा साबित होने वाली है।

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