इंडिया आउट भूल फिर भारत के पास पहुंचा मालदीव: खसरे के प्रकोप के बीच बड़े भाई ने भेजी जीवन रक्षक मदद
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कभी इंडिया आउट कैंपेन के जरिए भारत से दूरी बनाने की बात करने वाला मालदीव आज एक बड़े स्वास्थ्य संकट से जूझ रहा है। देश में अचानक फैले खसरे (Measles) के संक्रमण ने स्वास्थ्य व्यवस्था की कमर तोड़ दी है। ऐसे में भारत ने एक बार फिर अपनी पड़ोसी पहले (Neighbourhood First) नीति का पालन करते हुए मालदीव की ओर मदद का हाथ बढ़ाया है।

20,000 वैक्सीन और 3 टन दवाओं की खेप

भारत ने तत्काल प्रभाव से मालदीव को 20,000 एमआर (खसरा और रूबेला) वैक्सीन की डोज भेजी हैं। इसके अतिरिक्त, लगभग 3 टन वजन की मेडिकल सहायता भी पहुंचाई गई है। इसमें आवश्यक दवाएं, सिरिंज, डायग्नोस्टिक किट और संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए जरूरी अन्य चिकित्सा उपकरण शामिल हैं।

विदेश मंत्रालय का रुख

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस सहायता की पुष्टि की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि भारत फर्स्ट रिस्पॉन्डर (संकट में सबसे पहले पहुंचने वाला) की भूमिका निभाते हुए मालदीव के नागरिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। यह राहत सामग्री संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने में महत्वपूर्ण साबित होगी।

2021 में खसरा मुक्त हुआ था मालदीव

यह स्थिति इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 2021 में ही मालदीव को आधिकारिक तौर पर खसरा मुक्त (Measles Free) घोषित कर दिया था। उस समय माना गया था कि देश से इस बीमारी का स्थानीय संक्रमण पूरी तरह समाप्त हो गया है। हालांकि, हाल के महीनों में नए मामलों के अचानक सामने आने से स्वास्थ्य एजेंसियां सकते में हैं।

क्या है खसरा?

खसरा (Measles) एक बेहद संक्रामक वायरल बीमारी है, जो सांस की नली और फेफड़ों पर हमला करती है। यह बीमारी खासतौर पर छोटे बच्चों के लिए घातक होती है। संक्रमित व्यक्ति के छींकने या खांसने से यह वायरस तेजी से फैलता है। तेज बुखार, आंखों का लाल होना और शरीर पर चकत्ते इसके प्रमुख लक्षण हैं। यदि समय पर इलाज न मिले, तो यह जानलेवा साबित हो सकता है।

भारत-मालदीव संबंधों की नई मिसाल

भले ही राजनीतिक मंचों पर दोनों देशों के रिश्तों में उतार-चढ़ाव देखे गए हों, लेकिन मानवीय संकट के समय भारत ने हमेशा मालदीव के साथ मजबूती से खड़े होकर सिद्ध किया है कि वह क्षेत्र का सबसे भरोसेमंद साझेदार है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह त्वरित मदद न केवल मालदीव में खसरे के प्रकोप को रोकेगी, बल्कि दोनों देशों के बीच मानवीय संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करेगी।

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