जयपुर पोलो ग्राउंड पर केंद्र का बड़ा एक्शन: कब्जा लेकर चस्पा किया नोटिस, चेतावनी जारी
News Image

नई दिल्ली: लुटियंस दिल्ली के रेस कोर्स क्षेत्र में स्थित प्रतिष्ठित जयपुर पोलो ग्राउंड अब केंद्र सरकार के सीधे नियंत्रण में आ गया है। भूमि और विकास कार्यालय (L&DO) ने 15.20 एकड़ में फैले इस परिसर पर भौतिक कब्जा ले लिया है।

साइट पर लगा सख्त नोटिस

L&DO के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर गेट पर एक नोटिस चस्पा कर दिया है। इसमें साफ तौर पर कहा गया है कि यह भूमि सरकारी संपत्ति है। नोटिस के जरिए चेतावनी दी गई है कि यदि कोई भी व्यक्ति या संस्था यहां अनधिकृत प्रवेश, अतिक्रमण, निर्माण कार्य या कोई भी अवैध गतिविधि करने की कोशिश करती है, तो उसके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

अदालत से झटका, बेदखली पर रोक से इनकार

यह कार्रवाई 20 मई को जारी बेदखली आदेश के बाद की गई है। इंडियन पोलो एसोसिएशन (IPA) ने इस आदेश को चुनौती दी थी, लेकिन शुक्रवार को दिल्ली की एक सत्र अदालत ने बेदखली के निष्पादन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। न्यायाधीश धीरेंद्र राणा ने न्यायिक अनुशासन का हवाला देते हुए कहा कि चूंकि उच्च न्यायालय और अन्य अदालतों से भी एसोसिएशन को राहत नहीं मिली है, इसलिए फिलहाल कोई रोक नहीं लगाई जा सकती।

क्या है विवाद की जड़?

इंडियन पोलो एसोसिएशन का तर्क है कि यह पोलो ग्राउंड देश का एकमात्र प्रमुख कार्यरत स्थल है। वे सरकार की इस कार्रवाई को मनमाना और कानून के खिलाफ बता रहे हैं। मेजर निर्विकार सिंह (सेवानिवृत्त) ने कहा कि एसोसिएशन अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी विकल्पों का उपयोग करना जारी रखेगा। इस मामले की अगली सुनवाई 17 जून को होनी है।

सरकार का रुख: सार्वजनिक सुरक्षा है प्राथमिकता

केंद्र सरकार का कहना है कि यह जमीन सार्वजनिक उद्देश्य और रक्षा अवसंरचना को मजबूत करने के लिए आवश्यक है। सरकार की नजर लुटियंस दिल्ली की उस बेल्ट पर है जहां दिल्ली जिमखाना क्लब और दिल्ली रेस क्लब जैसे संस्थान स्थित हैं। सरकार ने इन सभी पर जमीन के अवैध कब्जे का आरोप लगाया है।

दिल्ली का दम घुट जाएगा

इधर, दिल्ली उच्च न्यायालय ने मामले की सुनवाई के दौरान मौखिक टिप्पणी करते हुए चिंता जताई थी। पीठ ने कहा था कि अगर इस तरह से हरियाली और खुले स्थान खत्म किए गए, तो दिल्ली का दम घुट जाएगा। अदालत ने सरकार से सवाल किया कि इतने वर्षों से चल रहे इन संस्थानों की जमीन की आवश्यकता अचानक कैसे महसूस होने लगी?

बहरहाल, कानूनी दांव-पेंचों के बीच सरकार का बुलडोजर और नोटिस अब इस ऐतिहासिक मैदान पर पूरी तरह हावी दिख रहे हैं।

*

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

नए आर्मी चीफ: लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ संभालेंगे भारतीय सेना की कमान, जानिए कौन हैं ये जांबाज अधिकारी

Story 1

वंदे भारत में सोनू सूद का सफर: पुरानी यादें और सोशल मीडिया पर छिड़ी आम बनाम खास की बहस

Story 1

लड़की हूं, फंसा दूंगी! : उत्तराखंड के डाकघर में हाईवोल्टेज ड्रामा, महिला कर्मचारी की धमकी का वीडियो वायरल

Story 1

# ISRO का बड़ा ऐलान: अब स्टूडेंट्स सीधे वैज्ञानिकों के साथ करेंगे काम, शुरू हुआ भारतीय अंतरिक्ष हैकाथॉन 2026

Story 1

ग्रेटर नोएडा में आवारा कुत्तों के साथ बर्बरता: वायरल वीडियो ने पशु सुरक्षा पर खड़े किए गंभीर सवाल

Story 1

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का आगाज: वॉटर कैनन सैल्यूट के साथ उतरी पहली फ्लाइट, जेवर में जश्न का माहौल

Story 1

दिल्ली-NCR में मौसम का मिजाज बदला: 70 किमी की रफ्तार वाली हवाओं के साथ झमाझम बारिश, गर्मी से बड़ी राहत

Story 1

अमेरिका-ईरान शांति समझौता: कच्चा तेल हुआ सस्ता, क्या भारत में अब कम होंगे पेट्रोल-दाम?

Story 1

120 किमी दूर से भी नहीं चूकता पिनाका : स्वदेशी रॉकेट की सटीक मारक क्षमता से थर्राया दुश्मन

Story 1

जेवर एयरपोर्ट का ऐतिहासिक आगाज़: पहली उड़ान में सवार हुए वे 180 किसान, जिन्होंने अपनी ज़मीन से सींचा इसे