राफेल डील: फ्रांस की ना-नुकुर के बाद कैसे भारत की शर्तों पर दुनिया ने टेके घुटने?
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भारत की कूटनीति और रक्षा नीतियों में आया बड़ा बदलाव आज पूरी दुनिया देख रही है। फ्रांस जैसे देश के साथ हुई राफेल विमानों की नई डील इसका सबसे बड़ा प्रमाण है। लंबे समय तक टालमटोल करने के बाद आखिरकार फ्रांस को भारत की शर्तो पर झुकना पड़ा है, जिससे भारत का मेक इन इंडिया अभियान और अधिक सशक्त हो गया है।

114 राफेल और तकनीक का हस्तांतरण भारत ने फ्रांस के सामने 114 अतिरिक्त राफेल फाइटर जेट्स खरीदने का प्रस्ताव रखा था। इस डील की मुख्य शर्त यह थी कि राफेल की तकनीक (Technological Transfer) भारत को दी जाए। अब फ्रांस ने इस पर अपनी सहमति दे दी है। इसके तहत, विमान के इंजन, ढांचे और अंदरूनी सॉफ्टवेयर की गोपनीय डिटेल्स भारत के साथ साझा की जाएंगी।

मेक इन इंडिया का नया अध्याय समझौते के अनुसार, 114 जेट्स में से 24 विमान तो रेडी टू फ्लाई कंडीशन में आएंगे, लेकिन बाकी बचे हुए जेट्स भारत में ही बनाए जाएंगे। नए बनने वाले राफेल के 55 से 60 प्रतिशत कलपुर्जे भारत में निर्मित होंगे। पहले फ्रांस इसके लिए तैयार नहीं था, लेकिन भारत के अडिग रुख के कारण अब यह मुमकिन हो पाया है।

ब्रह्मोस से लैस होगा दुनिया का सबसे घातक राफेल तकनीक मिलने का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भारतीय वायुसेना राफेल में अब अपने स्वदेशी हथियार इंटीग्रेट कर सकेगी। अब तक जो राफेल विदेशी मिसाइलों पर निर्भर था, वह जल्द ही भारत की अपनी ब्रह्मोस मिसाइल दागने में सक्षम होगा। इसके अलावा, राफेल के इंजन की तकनीक मिलने से भारत के महत्वाकांक्षी AMCA (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बेट एयरक्राफ्ट) प्रोजेक्ट को भी नई रफ्तार मिलेगी।

सुरक्षा का नया मूलमंत्र राफेल का भारत में निर्माण और मेंटेनेंस होने से भारतीय वायुसेना का खर्च काफी कम हो जाएगा। रूस से मिली मिग और सुखोई तकनीक के बाद, फ्रांस से मिल रही राफेल तकनीक यह दर्शाती है कि भारत अब सैन्य-तकनीक के मामले में दुनिया के विकसित देशों के बराबर खड़ा हो गया है।

राफेल की ताकत: एक अनसुना सच क्या आप जानते हैं कि राफेल का निर्माण ब्रिटेन और फ्रांस के बीच हुई तनातनी का नतीजा था? यह दुनिया का एकमात्र गैर-अमेरिकी फाइटर जेट है जिसे अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर पर उतरने की अनुमति है। इसकी एक और खासियत यह है कि इसे बीच हवा में ईंधन भरने के लिए किसी बाहरी टैंकर की जरूरत नहीं पड़ती, यह एक राफेल से दूसरे राफेल में ईंधन ट्रांसफर कर सकता है।

शुक्रनीति में भी कहा गया है कि राष्ट्र की सुरक्षा के लिए हथियारों का आधुनिकीकरण अनिवार्य है। राफेल के इस आधुनिक वर्जन के साथ भारत ने अपनी सैन्य ताकत में एक ऐसा इजाफा किया है, जो भविष्य में दुनिया को भारत की शर्तों को मानने के लिए मजबूर करेगा।

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