मध्यप्रदेश राज्यसभा चुनाव से जुड़ी एक बड़ी खबर में सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन की याचिका खारिज कर दी है। नटराजन ने रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा अपना नामांकन पत्र रद्द किए जाने के फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी।
अदालत का स्पष्ट रुख: चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं सुनवाई के दौरान जस्टिस पीके मिश्रा की पीठ ने स्पष्ट किया कि संविधान का अनुच्छेद 329(b) चुनाव प्रक्रिया के दौरान अदालती हस्तक्षेप पर रोक लगाता है। कोर्ट ने कहा कि नामाकंन रद्द करने जैसे विवादों के लिए इलेक्शन पिटीशन (चुनाव याचिका) ही एकमात्र वैध कानूनी रास्ता है।
साफ तौर पर अवैध नामांकन भी नहीं बना अपवाद नटराजन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया था कि नामांकन रद्द करना मनमाना और गैर-कानूनी था, इसलिए कोर्ट को तुरंत दखल देना चाहिए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों को साफ तौर पर गलत या सामान्य श्रेणियों में नहीं बांटा जा सकता। संविधान में ऐसे किसी हस्तक्षेप की अनुमति नहीं है।
फॉर्म 26 और हलफनामे में चूक का मामला मामले की सुनवाई के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले का बचाव करते हुए बताया गया कि नटराजन ने कंडक्ट ऑफ इलेक्शंस रूल्स, 1961 के नियम 4A का पालन नहीं किया। आरोप है कि हलफनामे (फॉर्म 26) के क्लॉज 5 के तहत उन्हें अपने लंबित आपराधिक मामलों की पूरी जानकारी देनी थी, जिसमें वे विफल रहीं। इसी आधार पर नामांकन को अधूरा मानकर रद्द किया गया था।
अब क्या है रास्ता? सुप्रीम कोर्ट ने राहत देने से इनकार तो किया, लेकिन मीनाक्षी नटराजन को यह भरोसा भी दिलाया कि इस आदेश का असर उनके भविष्य के कानूनी अधिकारों पर नहीं पड़ेगा। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि याचिकाकर्ता अब सक्षम उच्च न्यायालय में चुनाव याचिका दायर कर सकती हैं, जहाँ वे अपने सभी तर्क और दलीलें रख सकती हैं।
इस फैसले के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने फिर से यह स्थापित कर दिया है कि चुनावी विवादों में न्यायिक हस्तक्षेप की सीमाएं बेहद सख्त हैं और संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है।
The Supreme Court commences hearing of Congress leader Meenakshi Natarajan’s plea challenging the rejection of her Rajya Sabha nomination papers by (Returning Order). The RO rejected her nomination papers on the ground that Natarajan had allegedly failed to disclose a pending… pic.twitter.com/fJGB8XhC2O
— ANI (@ANI) June 12, 2026
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