शूटर जसपाल राणा के वायरल बायो का वो खौफनाक सच, जिसने मनु भाकर के भी उड़ा दिए होश!
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गुरुवार की रात भारतीय खेल जगत के लिए एक काला अध्याय लेकर आई। दिग्गज निशानेबाज और पेरिस ओलंपिक की स्टार मनु भाकर के कोच जसपाल राणा का 49 साल की उम्र में आकस्मिक निधन हो गया। इस खबर ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है, लेकिन उनके निधन के बाद उनके इंस्टाग्राम बायो ने सोशल मीडिया पर एक गहरा रहस्यमयी सस्पेंस पैदा कर दिया है।

मौत की पहले से आहट? बायो में छिपे शब्द

जसपाल राणा के निधन के बाद जब फैंस ने उनके सोशल मीडिया अकाउंट को खंगाला, तो उनका इंस्टाग्राम बायो चर्चा का विषय बन गया। बायो में लिखा था: जब मृत्यु निश्चित हो, तो खुद को किसी अच्छे काम के लिए समर्पित करना सबसे अच्छा है। इन शब्दों ने फैंस के रोंगटे खड़े कर दिए हैं। ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे राणा को जीवन की नश्वरता और अपने अंत का आभास पहले से ही हो चुका था।

म्यूनिख से दुखद वापसी: स्टेंट के बाद क्या बिगड़ा?

राणा की मौत की क्रोनोलॉजी बेहद चौंकाने वाली है। वे जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित ISSF वर्ल्ड कप से भारतीय टीम के साथ लौट रहे थे। फ्लाइट के दौरान ही उन्हें दिल से जुड़ी गंभीर समस्या हुई। दिल्ली पहुँचते ही उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ इमरजेंसी में स्टेंट डाला गया। शुरुआत में उनकी हालत स्थिर बताई गई थी, लेकिन अचानक तबीयत बिगड़ने से उन्होंने दम तोड़ दिया। यह मोड़ डॉक्टरों और करीबियों के लिए एक बड़ा सदमा है।

ओलंपिक सितारों के आर्कियोलॉजिस्ट

जसपाल राणा ने केवल शूटर नहीं, बल्कि चैंपियंस तैयार किए। मनु भाकर के कोच के रूप में उन्होंने भारतीय शूटिंग को एक नई दिशा दी। उनकी कोचिंग का आधार अनुशासन और मानसिक मजबूती थी, जिसने भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरव दिलाया। उत्तर प्रदेश स्टेट राइफल एसोसिएशन के अध्यक्ष श्याम सिंह यादव ने कहा, ऐसा कोच अब भारत में मिलना मुश्किल है। यह एक अपूरणीय क्षति है।

गोल्ड से गौरव तक का सफर

जसपाल राणा का करियर किसी फिल्म की पटकथा जैसा रहा है। महज 12 साल की उम्र में नेशनल गोल्ड जीतने वाले राणा ने 1994 के एशियन गेम्स में 16 साल का सूखा खत्म करते हुए सोना जीता था। 2006 के एशियन गेम्स में 3 गोल्ड और 1 सिल्वर मेडल जीतकर उन्होंने विश्व रिकॉर्ड की बराबरी की थी।

एक युग का अंत

जसपाल राणा अपने पीछे पत्नी रीना राणा, बेटी देवांशी और बेटे युवराज को छोड़ गए हैं। उनका पार्थिव शरीर दिल्ली स्थित सैनिक फार्म आवास पर लाया गया, जहाँ उनके चाहने वालों की भीड़ उमड़ पड़ी। भले ही वे आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके द्वारा तैयार किए गए ओलंपिक सितारे उनकी विरासत को हमेशा जीवित रखेंगे।

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