देश की राजनीति में इन दिनों एक बड़े महाविलय की चर्चा जोरों पर है। इंडिया ब्लॉक की बैठकों के बाद से ही कांग्रेस से अलग होकर बनी क्षेत्रीय पार्टियों के फिर से कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं। क्या ममता बनर्जी (TMC) और शरद पवार (NCP-SP) जैसे दिग्गज नेता फिर से कांग्रेस की मुख्यधारा में लौटेंगे? यह सवाल अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
अशोक गहलोत की घर वापसी की अपील राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस बहस को एक नई दिशा दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर स्पष्ट रूप से कहा कि कांग्रेस से अलग होकर बनी सभी पार्टियों को अब वापस अपने मूल संगठन में लौट आना चाहिए। गहलोत का मानना है कि सभी क्षेत्रीय दलों को पूरे दिल से राहुल गांधी को अपना नेता स्वीकार कर लेना चाहिए, ताकि लोकतंत्र को बचाया जा सके।
नाना पटोले का बड़ा दावा: मानसिकता बन रही है महाराष्ट्र कांग्रेस के नेता नाना पटोले ने भी इस संकेत को और हवा दी है। उन्होंने साफ कहा कि ममता बनर्जी और शरद पवार अब कांग्रेस के साथ आने की मानसिकता बना रहे हैं। पटोले के मुताबिक, देश की संवैधानिक व्यवस्था को बचाने और वोटों के विभाजन को रोकने के लिए समान विचारधारा वाले दलों का एक होना अनिवार्य हो गया है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि फिलहाल कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक प्रस्ताव नहीं दिया गया है।
संजय राउत का सुझाव: शरद पवार बनें सारथी शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने इस विलय की प्रक्रिया में शरद पवार को अग्रणी भूमिका निभाने का सुझाव दिया है। राउत का मानना है कि यदि कांग्रेस से अलग हुई विचारधाराएं पुनः एक हो जाती हैं, तो यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगी। उन्होंने कांग्रेस को और अधिक मजबूत बनाने पर जोर दिया।
सुप्रिया सुले का सधा हुआ संदेश वहीं, इन चर्चाओं पर एनसीपी (एसपी) सांसद सुप्रिया सुले ने अपने चिर-परिचित अंदाज में जवाब दिया। विलय के सवाल को टालते हुए उन्होंने कहा, अभी बारिश तो होने दो, फिर देखेंगे कि छतरी लेनी है या रेनकोट। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी ऐसी कोई स्थिति नहीं बनी है, लेकिन लोकतंत्र में चर्चाओं की गुंजाइश हमेशा रहती है। साथ ही उन्होंने ममता बनर्जी के साथ अपनी पार्टी की एकजुटता व्यक्त की।
क्या है राजनीतिक गणित? भाजपा के विजयी रथ को रोकने के लिए विपक्षी खेमा अब पूरी तरह से लामबंद दिख रहा है। गठबंधन के नेताओं को लग रहा है कि अकेले लड़ने के बजाय एक बड़ा मंच तैयार करना ही एकमात्र समाधान है। देखने वाली बात यह होगी कि क्या यह केवल एक राजनीतिक बयानबाजी है या पर्दे के पीछे वाकई कोई बड़ा गठबंधन तैयार हो रहा है।
All regional parties that separated from Congress should rejoin and wholeheartedly accept Sh. @RahulGandhi as their leader.
— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) June 12, 2026
I believe that what Sanjay Raut has said has merit. The time has come. Now the fight is to save democracy. When we are all in the battlefield fighting to… pic.twitter.com/8fDy8zevEc
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