भारतीय क्रिकेट में अब सरनेम की गूंज एक बार फिर सुनाई देने लगी है। बीसीसीआई द्वारा श्रीलंका दौरे के लिए घोषित अंडर-19 टीम में राहुल द्रविड़ के छोटे बेटे अन्वय द्रविड़ के चयन ने इस बहस को फिर से हवा दे दी है कि क्या प्रतिभा विरासत में मिलती है? आइए जानते हैं उन युवा सितारों के बारे में जो अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए टीम इंडिया की नीली जर्सी पहनने को बेताब हैं।
अन्वय द्रविड़: पिता की तरह विकेटकीपिंग का जिम्मा 17 वर्षीय अन्वय द्रविड़ ने वीनू मांकड़ ट्रॉफी में कर्नाटक की कप्तानी करते हुए अपनी छाप छोड़ी है। विकेटकीपर-बल्लेबाज के तौर पर अन्वय ने 6 मैचों में 220 रन बनाकर अपनी दावेदारी मजबूत की है। अब सबकी निगाहें श्रीलंका दौरे पर टिकी हैं, जहां उन्हें अपनी काबिलियत साबित करने का मौका मिलेगा।
समित द्रविड़: आक्रामक अंदाज और ऑलराउंड क्षमता राहुल द्रविड़ के बड़े बेटे समित द्रविड़ पहले ही अंडर-19 वर्ल्ड कप खेल चुके हैं। वो दाएं हाथ के बल्लेबाज और मीडियम पेसर गेंदबाज हैं। कूच बिहार ट्रॉफी में दोहरा शतक जड़कर उन्होंने अपनी आक्रामक शैली का परिचय दिया है। क्रिकेट के गलियारों में उन्हें सहवाग की आक्रामकता और द्रविड़ की एकाग्रता का मिश्रण माना जाता है।
अर्जुन तेंदुलकर: रफ्तार और मेहनत का मेल सचिन तेंदुलकर के बेटे अर्जुन तेंदुलकर लंबे समय से सीनियर स्तर पर संघर्ष कर रहे हैं। 26 साल के अर्जुन रणजी ट्रॉफी और आईपीएल में अपनी गेंदबाजी की छाप छोड़ चुके हैं। 135+ किमी प्रति घंटा की रफ्तार और फर्स्ट क्लास मैचों में 52 विकेट के साथ, अर्जुन किसी भी बड़े नाम के साये के बिना खुद को एक मेहनती गेंदबाज के रूप में स्थापित कर रहे हैं।
आर्यवीर सहवाग: पिता जैसी आतिशी बल्लेबाजी वीरेंद्र सहवाग के बेटे आर्यवीर भी अपने पिता की तरह ही खतरनाक अंदाज में बल्लेबाजी करते हैं। कूच बिहार ट्रॉफी में मेघालय के खिलाफ 297 रनों की विशाल पारी खेलकर उन्होंने अपनी प्रतिभा का डंका बजाया। 309 गेंदों की उस पारी में उनके 51 चौके इस बात का प्रमाण थे कि आक्रामकता उनके डीएनए में है।
अनाया बांगड़: जज्बे की नई मिसाल पूर्व भारतीय क्रिकेटर संजय बांगड़ की बेटी अनाया बांगड़ (पूर्व में आर्यन) अपनी बल्लेबाजी और स्पिन गेंदबाजी के लिए चर्चा में रही हैं। एक प्रतिभाशाली जूनियर क्रिकेटर के रूप में उन्होंने जेंडर ट्रांजिशन के बाद भी खेल के प्रति अपने जुनून को बरकरार रखा है। हालांकि, बीसीसीआई की ट्रांस-क्रिकेटर पॉलिसी अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन उनका खेल कौशल काबिले तारीफ है।
निष्कर्ष भारतीय क्रिकेट की यह अगली पीढ़ी केवल अपने पिता के नाम के सहारे नहीं, बल्कि अपनी मेहनत के दम पर आगे बढ़ रही है। चाहे पंड्या परिवार के युवा हों या दिग्गज क्रिकेटरों की संतानें, आने वाले समय में ये खिलाड़ी भारतीय क्रिकेट की नई इबारत लिखने के लिए तैयार हैं। रास्ता लंबा जरूर है, लेकिन इरादे फौलादी दिख रहे हैं।
Virender Sehwag’s son, Aaryavir, smashed an unbeaten 200 off 229 balls in the Cooch Behar Trophy, including 34 fours and 2 sixes.
— Vipin Tiwari (@Vipintiwari952) November 21, 2024
(Vid9/2) pic.twitter.com/NxwEpaFK6a
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