जेल में कैद, फिर भी बेखौफ! आखिर कौन चला रहा है लॉरेंस बिश्नोई का टेरर सिंडिकेट ?
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दिल्ली में फायरिंग का नया मामला दिल्ली के पश्चिम विहार इलाके में स्थित एक जिम पर हाल ही में हुई ताबड़तोड़ फायरिंग ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बाइक सवार दो हमलावरों ने सुबह के समय जिम पर 6-7 राउंड गोलियां चलाईं। यह जिम मशहूर पंजाबी गायक गुरु रंधावा की फ्रेंचाइजी से जुड़ा है। घटना के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने इसकी जिम्मेदारी लेते हुए इसे सलमान खान से नजदीकी की सजा बताया।

जेल से बाहर तक खौफ का कारोबार हैरानी की बात यह है कि लॉरेंस बिश्नोई पिछले काफी समय से जेल की सलाखों के पीछे है। फिर भी, पिछले तीन वर्षों में उसका गैंग देश की सात बड़ी हस्तियों के ठिकानों पर हमले कर चुका है। सिद्धू मूसेवाला की हत्या से लेकर सलमान खान के घर और बाबा सिद्दीकी की हत्या तक, लॉरेंस जेल में रहकर अपने क्राइम नेटवर्क को ऑपरेट कर रहा है। वह सीधे शूटर्स से बात करने के बजाय विदेशी हैंडलर्स का इस्तेमाल करता है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों के लिए उसे ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है।

एन्क्रिप्टेड टेक्नोलॉजी और सोशल मीडिया का जाल लॉरेंस बिश्नोई का नेटवर्क किसी मल्टीनेशनल कंपनी की तरह काम करता है। जेल के अंदर से वह एन्क्रिप्टेड ऐप्स, वीपीएन और सुरक्षित मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए अपने गुर्गों को निर्देश देता है। सोशल मीडिया का इस्तेमाल वह दो तरह से करता है—पहला, अपने रसूख का प्रदर्शन कर युवाओं को भ्रमित करना और दूसरा, हमलों की जिम्मेदारी लेकर व्यापारियों और सेलिब्रिटीज में दहशत पैदा करना ताकि जबरन वसूली (Extortion) का धंधा चलता रहे।

13 राज्यों में फैला क्राइम सिंडिकेट जांच एजेंसियों के मुताबिक, बिश्नोई की यह क्राइम कंपनी भारत के 13 राज्यों में फैली हुई है। इसके पास 700 से 800 से अधिक पेशेवर शूटर्स की फौज है। न केवल भारत, बल्कि कनाडा, अमेरिका और पुर्तगाल जैसे देशों में भी उसका नेटवर्क फैला हुआ है। कनाडा सरकार ने तो इसे एक आतंकी संगठन के रूप में चिह्नित भी किया है।

डर ही सबसे बड़ा हथियार लॉरेंस गैंग का मूल मंत्र जान लेना नहीं, बल्कि दहशत पैदा करना है। वह जानता है कि गोली से ज्यादा असर डर का होता है। सलमान खान के करीबी लोगों या उनसे जुड़े प्रोजेक्ट्स को निशाना बनाकर वह बॉलीवुड और बड़े कारोबारियों के बीच अपनी एक ऐसी अधोषित सत्ता स्थापित करना चाहता है, जिसे चुनौती देना किसी के लिए भी आसान न हो।

सवाल यह है कि आधुनिक तकनीक और सुरक्षा के दावों के बीच, जेल की चारदीवारी में बंद एक कैदी देश की कानून व्यवस्था को इतनी बड़ी चुनौती देने में कैसे सफल हो रहा है? यह न केवल पुलिस के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है।

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