असम-नागालैंड का ऐतिहासिक समझौता: तेल और गैस संसाधनों पर बनी 50-50 की सहमति
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नई दिल्ली: पूर्वोत्तर भारत के विकास की दिशा में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। असम और नागालैंड के बीच दशकों से चले आ रहे तेल और प्राकृतिक गैस उत्खनन विवाद को सुलझा लिया गया है। केंद्र सरकार की मध्यस्थता में हुए एक त्रिपक्षीय समझौते के तहत दोनों राज्य अब संसाधनों से मिलने वाले राजस्व को बराबर साझा करेंगे।

क्या है 50-50 का फार्मूला? केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में हुए इस समझौते के तहत, विवादित सीमावर्ती क्षेत्रों से निकलने वाले तेल और गैस पर दोनों राज्यों का समान अधिकार होगा। राजस्व और रॉयल्टी को 50-50 के अनुपात में बांटा जाएगा। यह फैसला राज्यों के बीच सीमा विवाद को प्राकृतिक संपदा के दोहन में बाधा न बनने देने की सोच के साथ लिया गया है।

अमित शाह बोले- ऐतिहासिक दिन समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर के बाद अमित शाह ने इसे राष्ट्र प्रथम की भावना का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल आर्थिक समझौता नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के विकसित पूर्वोत्तर के विजन को धरातल पर उतारने का एक बड़ा कदम है। इस पहल से पूरे क्षेत्र में ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता को नया बल मिलेगा।

नागालैंड में बढ़ेगी तेल खोज की संभावना इस समझौते की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नागालैंड अब केवल छह तेल क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं रहेगा। राज्य सरकार ने पूरे प्रदेश में अन्वेषण के लिए अपनी सहमति दी है। इससे राज्य की अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है और आने वाले समय में ऊर्जा क्षेत्र में भारी निवेश आकर्षित हो सकेगा।

विवादित क्षेत्रों का समाधान और एस्क्रो अकाउंट जिन क्षेत्रों में भूमि के मालिकाना हक को लेकर अभी भी कानूनी अस्पष्टता है, वहां से होने वाली कमाई को एक विशेष एस्क्रो अकाउंट में रखा जाएगा। यह व्यवस्था तब तक जारी रहेगी जब तक कि कानूनी रूप से अंतिम समाधान नहीं निकल जाता। खास बात यह है कि यह समझौता नागालैंड को प्राप्त विशेष संवैधानिक प्रावधानों (अनुच्छेद 371-A) को प्रभावित नहीं करेगा।

विकास और रोजगार के नए रास्ते विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से सिर्फ तेल उत्पादन ही नहीं बढ़ेगा, बल्कि लॉजिस्टिक्स, परिवहन और बुनियादी ढांचे के विकास से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। ओएनजीसी (ONGC) और अन्य तेल कंपनियों को अब वर्षों से ठप पड़े खनन कार्यों को आधुनिक तकनीकों के साथ फिर से शुरू करने की अनुमति मिल सकेगी।

यह समझौता असम और नागालैंड के बीच 434 किलोमीटर लंबी सीमा पर दशकों से चले आ रहे गतिरोध को खत्म करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है, जो भविष्य में पूर्वोत्तर की तस्वीर बदलने की क्षमता रखता है।

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