बस में फ्री सफर से लेकर कमाई तक: क्या कांग्रेस ने खोज लिया महिला वोट बैंक को साधने का अचूक फॉर्मूला?
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भारतीय राजनीति का चेहरा तेजी से बदल रहा है। अब चुनाव जीतने के लिए सिर्फ जाति या धर्म के समीकरण काफी नहीं हैं। पिछले कुछ वर्षों में महिला मतदाता एक निर्णायक शक्ति बनकर उभरी हैं, जिनका मतदान प्रतिशत अब पुरुषों के बराबर या उससे अधिक हो गया है। इसी को भांपते हुए कांग्रेस शासित राज्यों में कल्याणकारी योजनाओं का एक नया जाल बिछाया जा रहा है।

केरल: मुफ्त यात्रा का इंदिरा गारंटी मॉडल

केरल सरकार ने महिलाओं और ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की घोषणा की है। 15 जून से शुरू होने वाली इस योजना पर सालाना 700 से 800 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। यह राहुल गांधी की चुनावी इंदिरा गारंटी का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य कामकाजी महिलाओं के रोजमर्रा के खर्च को कम करके उन्हें राहत देना है।

तेलंगाना: बसों से महिलाओं की बंपर कमाई

इधर, तेलंगाना में मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने महिला स्वयं सहायता समूहों को 553 बसें सौंपकर एक अनूठा मॉडल पेश किया है। राज्य परिवहन निगम इन बसों को किराए पर लेगा और हर बस से समूह को करीब 70 हजार रुपये मासिक आय होगी। सरकार का लक्ष्य ऐसी 3,000 बसें महिला समूहों को देने का है, ताकि उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा सके।

महिलाओं को वोटर से इकोनॉमिक यूनिट बनाने की कोशिश

कांग्रेस की रणनीति अब केवल मुफ्त सामान देने तक सीमित नहीं है। पार्टी दो मोर्चों पर काम कर रही है:

  1. प्रत्यक्ष राहत: बस यात्रा जैसी सुविधाओं से जेब का खर्च बचाना।
  2. आर्थिक स्वावलंबन: तेलंगाना मॉडल की तरह महिलाओं को सीधे आय उपार्जन से जोड़ना।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिलाएं अब साइलेंट वोटर नहीं रहीं, बल्कि वे उन मुद्दों पर वोट करती हैं जिनका असर उनके घर-परिवार और दैनिक जीवन पर पड़ता है। महंगाई, स्वास्थ्य और परिवहन जैसी सुविधाएं उनके फैसलों की मुख्य धुरी बन गई हैं।

क्या यह सिर्फ चुनावी दांव है?

आलोचकों का एक वर्ग सवाल उठा रहा है कि क्या राज्यों की वित्तीय स्थिति इस तरह के बड़े खर्चों को झेल पाएगी? साथ ही, क्या ये योजनाएं स्थायी रोजगार का विकल्प हो सकती हैं? हालांकि, कांग्रेस का तर्क है कि वह महिलाओं के लिए सामाजिक सुरक्षा और कानूनी अधिकारों (जैसे 1955 का हिंदू कोड बिल और पंचायत आरक्षण) के अपने पुराने ट्रैक रिकॉर्ड को आधुनिक आर्थिक योजनाओं के साथ जोड़ रही है।

2029 की तैयारी और बदलती राजनीति

कांग्रेस की यह कोशिश साफ है—महिलाओं को केंद्र में रखकर पार्टी एक महिला केंद्रित राजनीति खड़ी करना चाहती है। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों में महिला मतदाता ही किंगमेकर की भूमिका निभाएंगी। भारतीय राजनीति के गलियारों में यह स्पष्ट संकेत है कि अब महिलाओं को नजरअंदाज करना किसी भी पार्टी के लिए सत्ता से बाहर होने का रास्ता हो सकता है।

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