सभी को अंत में कांग्रेस में ही आना होगा : टीएमसी-कांग्रेस विलय की चर्चाओं पर शुभंकर सरकार का बड़ा बयान
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पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर जारी उठापटक और ममता बनर्जी की सोनिया गांधी के साथ दिल्ली में हुई मुलाकात के बाद से राजनीतिक गलियारों में विलय की चर्चाएं तेज हो गई हैं। इस बीच, पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि अंततः सभी को कांग्रेस में आना ही होगा।

राजनीति संभावनाओं का खेल

विलय की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए शुभंकर सरकार ने कहा, राजनीति संभावनाओं की कला है। भविष्य में क्या होगा, इसका सटीक अनुमान लगाना मुश्किल है, लेकिन यह स्पष्ट है कि सभी को कांग्रेस की ओर ही लौटना होगा।

उन्होंने इसके पीछे की वजह बताते हुए कहा कि कांग्रेस एकमात्र ऐसी पार्टी है जहां आंतरिक लोकतंत्र जीवित है। यही कारण है कि कांग्रेस देश भर में लोकतंत्र की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ रही है, जो अन्य दलों में देखने को नहीं मिलता।

राहुल गांधी के साथ आएं, दरवाजे खुले हैं

शुभंकर सरकार ने भाजपा और आरएसएस की विचारधारा के खिलाफ राहुल गांधी के संघर्ष को अहम बताया। उन्होंने कहा कि जो लोग देश और संविधान को बचाना चाहते हैं, उन्हें राहुल गांधी के नेतृत्व में एक सहयोगी के रूप में साथ चलना होगा। उन्होंने साफ किया कि कांग्रेस उन सभी के लिए हमेशा तैयार है जो बिना डरे इस वैचारिक रास्ते पर चलने को तैयार हैं। उन्होंने पार्टी में शामिल होने को ताजगी भरी हवा करार दिया।

कांग्रेस आलाकमान ने किया खंडन

हालांकि, शुभंकर सरकार के इन दावों से उलट, कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने विलय की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है। इसे केवल अफवाह करार देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की कांग्रेस नेताओं से मुलाकात केवल इंडिया गठबंधन को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा थी।

पार्टी के संचार प्रभारी जयराम रमेश ने भी इन अटकलों को निराधार बताया है। वहीं, वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि उन्हें ऐसी किसी भी विलय या राजनीतिक समझौते की कोई जानकारी नहीं है और फिलहाल वे इस मामले पर पूरी तरह अंधेरे में हैं।

टीएमसी में आंतरिक कलह जारी

विलय की इन चर्चाओं के साथ ही टीएमसी के भीतर भी हलचल कम नहीं है। बागी गुट द्वारा 20 सांसदों के समर्थन का दावा किया जा रहा था, हालांकि सांसद प्रतिमा मंडल ने इन दावों को खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे पूरी तरह से ममता बनर्जी के साथ हैं। फिलहाल, यह देखना दिलचस्प होगा कि दिल्ली में हुई बैठकों और बयानों का असर बंगाल की भविष्य की राजनीति पर क्या पड़ता है।

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