होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय नाविकों की मौत: भारत ने अमेरिका के सामने दर्ज कराया कड़ा विरोध
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ओमान तट और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास वाणिज्यिक जहाजों पर हो रहे हमलों ने अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ा दी है। पलाऊ के झंडे वाले जहाज एमटी सेटेबेलो पर हुए हालिया हमले में तीन भारतीय नाविकों की दुखद मौत हो गई है, जिसके बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है।

अमेरिका को तलब कर जताया कड़ा विरोध विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पुष्टि की कि इस घटना को लेकर भारत ने अमेरिकी पक्ष के सामने अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। मंत्रालय ने अमेरिकी सीडीए (चार्ज डी अफेयर्स) को तलब कर इस क्षेत्र में जारी हमलों और असुरक्षा को लेकर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है।

अमेरिकी नौसेना की भूमिका पर सवाल प्रवक्ता ने संकेत दिया कि ये हमले उस क्षेत्र में तैनात अमेरिकी नौसेना की गतिविधियों से जुड़े हो सकते हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रभावित जहाज विदेशी ध्वज के थे और इनमें से कोई भी जहाज भारतीय स्वामित्व वाला नहीं था। फिर भी, भारतीय नागरिकों की जान जाना भारत के लिए गंभीर मुद्दा है।

नाविकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं रणधीर जायसवाल ने जोर देकर कहा कि भारत के लिए अपने नाविकों की सुरक्षा सर्वोपरि है। उन्होंने कहा, पिछले कुछ दिनों में हमने पश्चिम एशिया में भारतीय नाविकों से जुड़ी कई घटनाएं देखी हैं। हम अपने नाविक समुदाय की भलाई को सबसे अधिक महत्व देते हैं और इस स्थिति को कतई नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

शांति के लिए कूटनीति का आग्रह भारत ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि यह क्षेत्र में चल रहे संघर्ष का सीधा परिणाम है। भारत सरकार ने दोहराया है कि इन हमलों को तत्काल बंद होना चाहिए और क्षेत्र में शांति व स्थिरता बहाल करने के लिए बातचीत व कूटनीति ही एकमात्र रास्ता है।

खाड़ी क्षेत्र में तैनात हैं हजारों भारतीय नाविक पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में खाड़ी क्षेत्र में 18,000 से अधिक भारतीय नाविक अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें से 562 नाविक सीधे तौर पर भारतीय ध्वज वाले जहाजों पर तैनात हैं, जिनमें से बड़ी संख्या होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में कार्यरत है।

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